कई लड़कियाँ, एक पति | Episode 1 | खामोश कमरा और तूफानी दस्तक Episode 1 की खास बात पायल की शादी की पहली रात… एक सुनसान विला, दिल में डर और तभी खुलता है कमरे का भारी दरवाज़ा। सामने खड़ा है जय—जिसकी सख्त शख्सियत और जिद पायल की घबराहट को और बढ़ा देती है। उस रात की पहली दस्तक के साथ शुरू होती है एक ऐसी कहानी, जिसमें आगे कई राज़ खुलने वाले हैं।

 

Episode 1: खामोश कमरा और तूफानी दस्तक

दिल्ली के एक शांत और पॉश इलाके में बना वह आलीशान विला शहर की चकाचौंध से दूर, पूरी तरह एकांत में खड़ा था। रात की चादर तले वह कोठी किसी खामोश किले जैसी लग रही थी, जिसके भीतर एक नए जीवन की शुरुआत होने जा रही थी।

कमरे के भीतर, पीले और मंद प्रकाश के बीच, सजी हुई सेज पर बैठी पायल का दिल किसी सहमी हुई चिड़िया की तरह तेजी से धड़क रहा था। उसके शरीर पर लाल जोड़े का भारीपन और जेवरों की सजावट थी, लेकिन उससे कहीं ज्यादा भारी उसके मन का डर था।

थोड़ी देर पहले ही उसकी दोस्त टीना उसे छेड़ते हुए कहकर गई थी— "पायल, आज तेरी सुहागरात है... दर्द तो एक बार सबको होता है, दर्द के बाद ही सुकून मिलता है।" टीना की वो बातें और खुद पायल का अंदर से कांपता हुआ मन उसे बार-बार डरा रहा था। उसने मन ही मन सोचा— “जय इतने हट्टे-कट्टे और रोबदार इंसान हैं, और मैं... इस छोटी सी दुनिया से आई एक सीधी-साधी लड़की! अगर उन्होंने अपनी सख्त शख्सियत की तरह इस रात में भी नरमी नहीं बरती, तो मेरा क्या होगा?”

उसके माथे पर पसीने की बूंदें थीं और हाथ-पांव ठंड से कांप रहे थे। वह बार-बार दरवाजे की तरफ देखती और खुद को दिलासा देने की कोशिश करती— “क्या सच में यह रात उतनी डरावनी है जितनी टीना कह रही थी? या फिर...?”

अभी उसके मन में ये उथल-पुथल चल ही रही थी कि तभी अचानक—

क्रीक...

कमरे का भारी दरवाजा धीरे से खुला और फिर एक झटके में पूरा चौड़ा हो गया।

दरवाजे की चौखट पर जो शख्स खड़ा था, उसे देख कर पायल की सांसें जैसे गले में ही अटक गईं।

वह 24 साल का जवान, सख्त मिजाज और गठीले बदन का मालिक जय था। मिताली प्रोडक्शन के सीईओ के रूप में उसकी रौबदार शख्सियत और तीखी नजरों से बड़े-बड़े बिजनेस टाइकून तक थरथर कांपते थे। आज उसकी काली, गहरी आंखों में एक अजीब सी तीव्रता और चेहरे पर दिनभर की थकान के साथ-साथ एक अनकहा गुस्सा और जिद साफ झलक रही थी। उसकी चौड़ी छाती और सख्त जबड़े इस बात की गवाही दे रहे थे कि वह इस रिश्ते और इस रात को अपनी शर्तों पर जीने वाला इंसान है।

जय ने बिना एक शब्द बोले अंदर कदम रखा। उसके जूतों की भारी आवाज उस शांत कमरे के संगमरमर के फर्श पर गूंज उठी। उसने अपनी कफलिंक खोलते हुए अपनी ठंडी, पैनी निगाहें सीधे सेज पर बैठी सहमी हुई पायल पर टिका दीं।

पायल का दिल जोर से धड़क उठा। उसने डरते हुए अपनी पलकें झुका लीं, लेकिन जय के कदमों की आहट उसके दिल की धड़कनों को और तेज कर रही थी।

जय सीधा चलकर उसके बिल्कुल करीब आ गया। उसके शरीर से आती महक और उसके चारों तरफ छाई उस भारी खामोशी ने कमरे के तापमान को और बढ़ा दिया।

जय ने अपना हाथ आगे बढ़ाया और अपनी उंगलियों से पायल की झुकी हुई ठुड्डी को पकड़कर धीरे से ऊपर उठाया। उसकी आंखें सीधे पायल की डरी हुई आंखों में झांक रही थीं।

"डर क्यों रही हो, पायल?" जय की गहरी और भारी आवाज उस खामोश कमरे में गूंजी, जिसमें नरमी कम और एक अधिकार का भाव ज्यादा था। "यह रात डराने के लिए नहीं, हमारे बीच की दूरियां मिटाने के लिए है... और अब यहाँ से भागने का कोई रास्ता नहीं है।"

जय की उन शब्दों ने पायल के रोंगटे खड़े कर दिए। इससे पहले कि वह कुछ बोल पाती, जय ने अपने मजबूत हाथों से उसे अपनी बाहों के घेरे में ले लिया—और यहीं से उनकी उस जिद, खिंचाव और एक नए तूफान से भरी सुहागरात का असल सफर शुरू हुआ।

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