राजस्थान के इतिहास के स्रोत (भाग-1) - महत्वपूर्ण शिलालेख एवं प्रशस्तियाँ | RPSC, REET & Exam Notes Rpsc New Pattren
राजस्थान के इतिहास के स्रोत
महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तरी — प्रश्न 1 से 40
RPSC एवं शिक्षक भर्ती परीक्षाओं के लिए उपयोगी अध्ययन सामग्री
इस पोस्ट में प्रश्न 1 से प्रश्न 40 तक के प्रश्न, विकल्प, उत्तर और व्याख्या दी गई है।
प्रश्न 1:
इतिहास के संबंध में दिए गए कथनों को ध्यान से पढ़िए:
1. प्रो. जॉन ब्यूरी ने कहा था कि "इतिहास विज्ञान है, न कम न अधिक।"
2. ए.एल. राउज के अनुसार इतिहास लिखने की प्रक्रिया वैज्ञानिक है, लेकिन इसे लिखना या सृजन करना एक कला है। सही विकल्प चुनिए:
(अ) केवल 1 सही है
(ब) केवल 2 सही है
(स) दोनों 1 और 2 सही हैं
(द) दोनों गलत हैं
प्रश्न 2:
राजस्थान के इतिहास के स्रोतों का कौन सा जोड़ा सही मेल नहीं खाता है?
(अ) पुरातात्विक स्त्रोत - शिलालेख, दानपत्र, मूर्तिलेख, मुद्राएँ
(ब) कलात्मक स्त्रोत - भित्ति चित्र, मंदिर, तस्वीरें, मुद्राएँ
(स) पुरालेखीय स्त्रोत - बही, पट्टे, फाइल, फरमान
(द) ऐतिहासिक साहित्य - काव्य ग्रंथ, ऐतिहासिक तवारीखें, यात्रियों के विवरण
प्रश्न 3:
बड़ली के स्तंभ लेख के बारे में कौन-से कथन सही हैं?
1. यह स्तंभ लेख अजमेर जिले के बड़ली गाँव के भीलोत् माता मंदिर से मिला है।
2. सन 1912 में इसे डॉ. गौरीशंकर हीराचंद ओझा (जी.एच. ओझा) ने खोजा था।
3. यह राजस्थान का सबसे प्राचीन और भारत का सबसे पुराना अभिलेख है। सही विकल्प चुनें:
(अ) केवल 1 और 2
(ब) केवल 2 और 3
(स) केवल 1 और 3
(द) 1, 2 और 3
प्रश्न 4:
सम्राट अशोक के बैराठ (भाब्रू) शिलालेख के संबंध में सही कथन कौन-सा/से है/हैं?
1. बैराठ से मौर्य राजा अशोक के दो शिलालेख मिले हैं—एक बीजक की पहाड़ी पर और दूसरा भीम की डूंगरी पर।
2. बीजक की पहाड़ी पर मिले भाब्रू शिलालेख की खोज 1837 में कैप्टन बर्ट ने की थी।
3. इस शिलालेख से पता चलता है कि सम्राट अशोक बौद्ध धर्म को मानने वाले थे। सही विकल्प चुनिए:
(अ) केवल 1 और 2
(ब) केवल 2 और 3
(स) केवल 1 और 3
(द) 1, 2 और 3
प्रश्न 5:
1871-72 ई. में भीम की डूंगरी (बैराठ) पर स्थित अशोक के दूसरे छोटे शिलालेख की खोज किसने की थी?
(अ) कर्नल जेम्स टॉड
(ब) डॉ. जी.एच. ओझा
(स) कार्लाइल
(द) कैप्टन बर्ट
प्रश्न 6:
नगरी का लेख (200-150 ई.पू.)और घोसुंडी शिलालेख द्वितीय शताब्दी ईसा पूर्व के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह एक खंड-लेख (टूटा हुआ) है जो मूल लेख का दाहिना भाग है और यह नगरी (चित्तौड़गढ़) से प्राप्त हुआ था।
2. इसे डॉ. गौरीशंकर हीराचंद ओझा (जी.एच. ओझा) ने प्राप्त कर उदयपुर संग्रहालय में सुरक्षित रखवाया था।
3. घोसुंडी शिलालेख लेख से दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व में भागवत धर्म के प्रचार तथा संकर्षण और वासुदेव की मान्यता का ज्ञान होता है।
सही विकल्प चुनें:
(अ) केवल 1 और 2
(ब) केवल 2 और 3
(स) केवल 1 और 3
(द) 1, 2 और 3
प्रश्न 7:
गंगाधर का शिलालेख (424 ई.) के संबंध में सही कथन कौन-सा है?
(अ) यह शिलालेख झालावाड़ के गंगधार क्षेत्र से मिला है।
(ब) इसके अनुसार मालव संवत 480 में परम वैष्णव मयूराक्ष द्वारा मदिरा पीने वाली देवियों (डाकिनियों) से भरे एक देवी मंदिर के निर्माण का पता चलता है।
(स) इसमें तांत्रिक विचारधारा के अंतर्गत मातृकाओं के पवित्र स्थान के निर्माण का उल्लेख है।
(द) उपर्युक्त सभी कथन सत्य हैं।
प्रश्न 8:
अपराजित का शिलालेख (661 ई.) किस स्थान से प्राप्त हुआ था तथा इससे किस राजवंश की जानकारी मिलती है?
(अ) नागदा (कुण्डेश्वर मंदिर) - गुहिल वंश
(ब) ओसियां (जोधपुर) - प्रतिहार वंश
(स) चित्तौड़गढ़ (कलिका माता मंदिर) - मौर्य वंश
(द) मंडोर (जोधपुर) - चाहमान वंश
प्रश्न 9:
मंडोर का शिलालेख (685 ई.) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह जोधपुर के निकट मंडोर नामक स्थान की पहाड़ी ढाल में एक बावड़ी में उत्कीर्ण है।
2. इस शिलालेख के अनुसार इस बावड़ी के निर्माता ब्राह्मण चणक के पुत्र माधु थे।
3. इसमें विक्रम संवत 742 (685 ई.) का उल्लेख मिलता है।
सही विकल्प चुनें:
(अ) केवल 1 और 2
(ब) केवल 2 और 3
(स) केवल 1 और 3
(द) 1, 2 और 3
प्रश्न 10:
बसंतगढ़ का लेख (625 ई.) किस स्थान से प्राप्त हुआ था तथा इससे किस महत्वपूर्ण ऐतिहासिक प्रथा की जानकारी मिलती है?
(अ) ओसियां (जोधपुर) - दमन प्रथा
(ब) सिरोही (खिम माता मंदिर) - सामंत प्रथा
(स) बिजोलिया (भीलवाड़ा) - भू-राजस्व प्रथा
(द) मंडोर (जोधपुर) - दास प्रथा
प्रश्न 11:
सामोली शिलालेख (646 ई.) के संबंध में कौन-सा कथन सत्य है?
(अ) यह लेख मेवाड़ के गुहिल राजा शीलदित्य के समय का है।
(ब) इसमें प्रयुक्त की गई भाषा संस्कृत तथा लिपि कुटिल है।
(स) इस लेख से जावर के निकट अरण्यगिरि में तांबे और जस्ते की खानों का कामारंभ होने की जानकारी मिलती है।
(द) उपर्युक्त सभी कथन सत्य हैं।
प्रश्न 12:
मानमोरी अभिलेख (चित्तौड़गढ़, 713 ई.) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अभिलेख का प्रशस्तिकार नागभट्ट का पुत्र पुष्प एवं उत्कीर्णक करुण का पौत्र शिवादित्य था।
2. इसमें चित्रांग मौर्य का उल्लेख है जिन्होंने चित्तौड़गढ़ दुर्ग का निर्माण करवाया था।
3. कर्नल जेम्स टॉड जब इस अभिलेख को इंग्लैंड ले जा रहे थे, तब जहाज के भारी होने के कारण इसे समुद्र में फेंकना पड़ा था।
सही विकल्प चुनें:
(अ) केवल 1 और 2
(ब) केवल 2 और 3
(स) केवल 1 और 3
(द) 1, 2 और 3
प्रश्न 13:
कणसवा का लेख (738 ई.) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह लेख कोटा के निकट कणसवा गाँव के शिवालय में लगा हुआ है और यह विक्रम संवत 795 का है।
2. इसमें धवल नामक राजा का नाम मिलता है जो मौर्यवंशी राजा था।
3. यह शिलालेख 10वीं शताब्दी के धार्मिक जीवन, गाँवों की सीमा, जनजीवन, शासन-व्यवस्था और आर्थिक व्यवस्था पर अच्छा प्रकाश डालता है।
सही विकल्प चुनें: (अ) केवल 1 और 2 (ब) केवल 2 और 3 (स) केवल 1 और 3 (द) 1, 2 और 3
प्रश्न 14:
बुचकला शिलालेख (815 ई.) के संदर्भ में सही कथन कौन-सा/से है/हैं?
1. इस लेख की खोज ब्रह्मभट्ट नानूराम ने बिलाड़ा (जोधपुर ग्रामीण) के निकट बुचकला के पार्वती के मंदिर के सभामंडप से की थी।
2. यह लेख वत्सराज के पुत्र नागभट्ट प्रतिहार के समय का है और संस्कृत भाषा में गद्य रूप में लिखा गया है।
3. इस प्रशस्ति से हमें उस समय के शासकों और सामंतों के संबंधों का अनुमान लगाने में मदद मिलती है।
सही चुनें: (अ) केवल 1 और 2 (ब) केवल 2 और 3 (स) केवल 1 और 3 (द) 1, 2 और 3
प्रश्न 15:
मंडोर का शिलालेख (830 ई.) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह लेख मूलतः मंडोर के किसी विष्णु मंदिर में लगा था, जो बाद में जोधपुर शहर के शहरपनाह में लगा दिया गया था।
2. इस अभिलेख को बाउक प्रतिहार ने उत्कीर्ण करवाया था जिसमें विष्णु एवं शिव की पूजा का उल्लेख है।
3. यह लेख मंडोर के प्रतिहारों की वंश परंपरा जानने के लिए बहुत उपयोगी है।
सही विकल्प चुनें: (अ) केवल 1 और 2 (ब) केवल 2 और 3 (स) केवल 1 और 3 (द) 1, 2 और 3
प्रश्न 16:
घटियाला के शिलालेख (861 ई.) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर कौन-सा कथन असत्य है?
(अ) कक्कुट के समय के ये लेख चार लेखों के समूह के रूप में घटियाला (जोधपुर) स्थित एक स्तंभ के दो पासों पर उत्कीर्ण हैं।
(ब) यह लेख संस्कृत भाषा में है जिसमें केवल गद्य का प्रयोग किया गया है, पद्य का नहीं।
(स) इन शिलालेखों से मंडोर के प्रतिहारों की नामावली तथा उनकी उपलब्धियों पर अच्छा प्रकाश पड़ता है, और इसके प्रारंभिक शासक हरिश्चंद्र थे।
(द) इन लेखों का लेखक मग तथा उत्कीर्ण करने वाला कृष्णोधर था।
प्रश्न 17:
प्रतापगढ़ अभिलेख (946 ई.) के संबंध में सही कथन चुनिए:
(अ) इस अभिलेख में गुर्जर-प्रतिहार नरेश महेंद्रपाल की उपलब्धियों का वर्णन किया गया है।
(ब) यह शिलालेख मूल रूप से चैनराम अग्रवाल की बावड़ी के निकट एक चबूतरे पर लगा हुआ था।
(स) वर्तमान में डॉ. जी.एच. ओझा इसे अजमेर संग्रहालय ले गए थे।
(द) उपर्युक्त सभी कथन सत्य हैं।
प्रश्न 18:
सारणेश्वर प्रशस्ति (953 ई.) किस स्थान से प्राप्त हुई है और इससे किस विषय की प्रमुख जानकारी मिलती है?
(अ) उदयपुर - वराह मंदिर की व्यवस्था, स्थानीय व्यापार और शासकीय पदाधिकारी
(ब) चित्तौड़गढ़ - मौर्य वंश के राजाओं का इतिहास
(स) सिरोही - जैन तीर्थंकरों और उनकी शिक्षाएं
(द) जोधपुर - प्रतिहार शासकों की सैन्य टुकड़ियां
प्रश्न 19:
नाथ प्रशस्ति - एकलिंगजी (971 ई.) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह एकलिंगजी के मंदिर से कुछ ऊपर लकुलीश (लकुलीश) के मंदिर में लगा हुआ है, जिसे 'नाथ प्रशस्ति' भी कहते हैं।
2. इस प्रशस्ति की भाषा संस्कृत (पदों में) है और इसमें देवनागरी लिपि का प्रयोग किया गया है।
3. इस प्रशस्ति के रचयिता वेदामुनि के शिष्य आत्र कवि हैं और यह मेवाड़ का राजनीतिक व सांस्कृतिक इतिहास जानने के लिए अत्यंत उपयोगी है।
सही विकल्प चुनें: (अ) केवल 1 और 2 (ब) केवल 2 और 3 (स) केवल 1 और 3 (द) 1, 2 और 3
प्रश्न 20:
हर्ष नाथ के मंदिर की प्रशस्ति (973 ई.) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सीकर के हर्ष पर्वत पर स्थित शिव मंदिर से प्राप्त यह प्रशस्ति चौहान शासक विग्रहराज के सामंत शैव आचार्य अल्लट ने बनवाई थी (इसका निर्माण कार्य 961 ई. में सिंहराज के समय शुरू हुआ था)।
2. इससे सांबर के चौहान राजा विग्रहराज द्वितीय के समय की जानकारी मिलती है तथा यह बताती है कि सिंहराज ने तोमर वंशी सलवण को परास्त किया था।
3. इस लेख में पाशुपत संप्रदाय से संबंधित गुरु विश्व रूप का उल्लेख मिलता है।
सही विकल्प चुनें: (अ) केवल 1 और 2 (ब) केवल 2 और 3 (स) केवल 1 और 3 (द) 1, 2 और 3
प्रश्न 21:
अर्थुणा (बांसवाड़ा) के शिव मंदिर की प्रशस्ति (1079 ई.) के संबंध में असत्य कथन को पहचानिए:
(अ) यह शिलालेख विक्रम संवत 1136 (1079 ई.) में मंडलेश्वर अर्थूना के विशाल शिवालय में लगाया गया था।
(ब) इस मंदिर का निर्माण मंडूराज ने अपने पिता चामुंडराज के लिए करवाया था।
(स) इस प्रशस्ति में 87 श्लोक हैं जिनमें वागड़ के परमारों का अच्छा वर्णन मिलता है
(द) इस प्रशस्ति की रचना विजय ने की थी और इसे अस्तराज कायस्थ ने लिखा तथा गंदाक नामक सूत्रधार ने उत्कीर्ण की थी।
प्रश्न 22:
अर्थुणा (बांसवाड़ा) के जैन मंदिर की प्रशस्ति (1109 ई.) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस प्रशस्ति से वागड़ के परमार शासकों (मंडलीक, चामुंडराज व विजयराज) का इतिहास ज्ञात होता है।
2. इस लेख में विजयराज के संधि-विग्रहिक वालम जाति के वामन कायस्थ का वर्णन मिलता है।
3. इस प्रशस्ति से यह ज्ञात होता है कि उस समय गाँवों के शासन में 'ग्रामणी' प्रमुख होता था, जिसे समाज में प्रतिष्ठित स्थान प्राप्त था।
सही विकल्प चुनें: (अ) केवल 1 और 2 (ब) केवल 2 और 3 (स) केवल 1 और 3 (द) 1, 2 और 3
प्रश्न 23:
जालौर का लेख (1118 ई.) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह शिलालेख जालौर दुर्ग में स्थित तोपखाना की इमारत पर लगा हुआ था, जिसे अब जोधपुर संग्रहालय में सुरक्षित रख दिया गया है।
2. इसमें जालौर शाखा के परमार वंश की वंसवली दी गई है, जिसमें वाक्पतिराज से लेकर बीसल तक के नाम दिए गए हैं और परमारों की उत्पत्ति वशिष्ठ मुनि के यज्ञ से बताई गई है।
3. इस लेख में वीसल की रानी मेलरदेवी के संबंध में अंकित है कि उसने सिंधु राजेश्वर के मंदिर के लिए सुवर्ण कलश अर्पित किया था।
सही विकल्प चुनें: (अ) केवल 1 और 2 (ब) केवल 2 और 3 (स) केवल 1 और 3 (द) 1, 2 और 3
प्रश्न 24:
इग्लौंड़ा का शिलालेख (1133 ई.) के संबंध में कौन-सा कथन सत्य है?
(अ) यह वि.सं. 1190 (1133 ई.) का प्रतिहार कालीन लेख है जो संस्कृत पद्य में 15 पंक्तियों में उत्कीर्ण है।
(ब) इस लेख में प्रतिहार शासक पृथ्वीपाल, तिहुणपाल व विभुपाल का उल्लेख मिलता है तथा इनकी महाराजधिराज उपाधियाँ बताती हैं कि कन्नौज से शक्ति क्षीण होने पर भी इन्होंने ये उपाधियाँ धारण की थीं।
(स) इस लेख में आषाढ़ शुक्ल एकादशी के अवसर पर श्री गोहदेश्वर महादेव मंदिर के लिए आगासिया गाँव को भेंट करने का उल्लेख है तथा ब्राह्मणों के रहने के भाग को 'ब्रह्मपुरी' कहा जाता था।
(द) उपर्युक्त सभी कथन सत्य हैं।
प्रश्न 25:
नाडोल का लेख (1138 ई.) किस मंदिर के एक स्तम्भ पर उत्कीर्ण है?
(अ) नेमिनाथजी के मंदिर
(ब) पार्श्वनाथ जैन मंदिर
(स) महालक्ष्मीनारायण मंदिर
(द) सोमनाथ मंदिर
प्रश्न 26:
चित्तौड़ का कुमारपाल का शिलालेख (1150 ई.) के संदर्भ में सही कथन चुनिए:
(अ) यह शिलालेख चित्तौड़ के समिधेश्वर के मंदिर से प्राप्त हुआ है जो कुमारपाल सोलंकी के समय का है।
(ब) इस प्रशस्ति के रचयिता जयकीर्ति के शिष्य रामकीर्ति थे जो एक दिगंबर जैन विद्वान थे।
(स) इस लेख से यह तथ्य सिद्ध होता है कि गुहिल पहले चौहानों के सामंत थे और इसमें चौहानों के अमोध गुहिलवंशीय नृपतिक का सामंत होना तथा उसका शासन में योगदान देना उल्लिखित है।
(द) उपर्युक्त सभी कथन सत्य हैं।
प्रश्न 27:
किराडू लेख (1161 ई.) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किराडू (बाड़मेर) के एक शिव मंदिर से प्राप्त इस प्रशस्ति से किराडू की परमार शाखा का वंशक्रम तथा आबू के उत्पलराज के पिता सिद्धराज का नाम भी प्राप्त होता है।
2. इस लेख में परमारों की उत्पत्ति वशिष्ठ मुनि के आबू यज्ञ से बतलाई गई है तथा सिंनसुराज को मारवाड़ का शासक बताया गया है।
3. इस प्रशस्ति के प्रशस्तिकार नरसिंह, लेखक यशोदेव और उत्कीर्णक यशोधर थे।
सही विकल्प चुनें: (अ) केवल 1 और 2 (ब) केवल 2 और 3 (स) केवल 1 और 3 (द) 1, 2 और 3
प्रश्न 28:
बिजोलिया का लेख (1170 ई.) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह लेख बिजोलिया में स्थित पार्श्वनाथ मंदिर की उत्तरी दीवार के पास एक चट्टान पर उत्कीर्ण है जिसके निर्माता माहणक थे।
2. इससे सांभर और अजमेर के चौहान वंश की सूची तथा उनकी उपलब्धियों की अच्छी जानकारी मिलती है जिसमें चौहानों के आदि पुरुष वासुदेव चौहान को 551 ई. में सांबर में चौहान राज्य की स्थापना करने वाला बताया गया है।
3. इस लेख में प्राचीन स्थानों के नाम मिलते हैं जैसे जाबालिपुर (जालौर), नडूल (नाडोल), शांकभरी (सांभर), श्रीमाल (भीममाल) आदि, तथा भूमि अनुदान को 'दोहली' कहा जाता था।
सही विकल्प चुनें: (अ) केवल 1 और 2 (ब) केवल 2 और 3 (स) केवल 1 और 3 (द) 1, 2 और 3
प्रश्न 29:
लूणवसही (आबू-देलवाड़ा) की प्रशस्ति (1230 ई.) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह प्रशस्ति आबू के देलवाड़ा गाँव के लूणवसही के मंदिर से प्राप्त हुई है जिसकी भाषा संस्कृत तथा यह गद्य में लिखी गई है।
2. इस प्रशस्ति के अनुसार, सोमसिंह के समय में मंत्री वास्तुपाल के छोटे भाई तेजपाल ने देलवाड़ा गाँव में लूणवसही नामक नेमिनाथ का मंदिर अपनी स्त्री अनुपमादेवी के श्रेय के लिए बनवाया था।
3. इस मंदिर की प्रतिष्ठा विजयसेन सूरि ने की थी तथा इसमें आबू के परमार शासकों एवं वास्तुपाल-तेजपाल के वंश का वर्णन मिलता है।
सही विकल्प चुनें: (अ) केवल 1 और 2 (ब) केवल 2 और 3 (स) केवल 1 और 3 (द) 1, 2 और 3
प्रश्न 30:
चीरवा का शिलालेख (1273 ई.) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह शिलालेख चीरवा गाँव (उदयपुर) के एक मंदिर के बाहरी द्वार पर लगा हुआ है।
2. यह लेख वागेश्वर और वागेश्वरी की आराधना से आरंभ होता है और इसमें गुहिलवंशीय बाप्पा के वंशज पद्मसिंह, जैत्रसिंह, तेजसिंह और समरसिंह की उपलब्धियों का वर्णन है।
3. भुवनसिंहसूरि के शिष्य रत्नप्रभसूरि ने इस शिलालेख की रचना की थी, मुख्य शिष्य पार्श्वचंद्र ने इसे लिखा, पद्मसिंह के पुत्र केलिसिंह ने इसे उत्कीर्ण किया तथा शिल्पी दल्हण ने दीवार में लगाने का कार्य किया था।
सही विकल्प चुनें: (अ) केवल 1 और 2 (ब) केवल 2 और 3 (स) केवल 1 और 3 (द) 1, 2 और 3
भाग 1 के 30 प्रश्न पूरे होते हैं। अब अगले भाग की शुरुआत कर रहे हैं।
प्रश्न 31:
रसिया की छतरी का लेख (1274 ई.) के संबंध में कौन-सा कथन सत्य है?
(1) यह लेख वि.सं. 1331 (1274 ई.) का है जिसकी रचना प्रियपट्ट के पुत्र नागर जाति के ब्राह्मण वेद शर्मा ने की थी और इसके सूत्रधार सज्जन थे।
(ब) यह शिलालेख चित्तौड़गढ़ में रसिया की छतरी के दोनों ओर ताकों में लगा हुआ था।
(स) इस लेख में बाप्पा रावल को हारित ऋषि का पुत्र बताने की ऐतिहासिक भूल की गई है, जबकि इसके प्रारंभिक श्लोकों में देवताओं की वंदना और गुहिल वंश के विभिन्न शासकों का वर्णन है।
(द) उपर्युक्त सभी कथन सत्य हैं।
प्रश्न 32:
अचलश्वर लेख (आबू का लेख / 1285 ई.) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह लेख अचलश्वर (आबू) के मंदिर के पास स्थित मठ की एक चौपाल की दीवार पर लगा हुआ था जिसमें आबू के पंवार (परमार) शासक धारावर्ष के काल तक की वंसवली दी गई है।
2. इस प्रशस्ति में प्रशस्तिकार लिखता है कि बाप्पा के द्वारा यहाँ पूर्वजों का संहार हुआ और उनकी चर्चा से यहाँ की भूमि गीली हो जाने से इसे 'मेद्पाट' कहा गया।
3. नागदा नगर के संबंध में हारित ऋषि का वर्णन आता है जिन्होंने यहाँ कठिन तपस्या की थी और जिनकी अनुकंपा से बाप्पा को राज्य और क्षत्रियत्व की प्राप्ति हुई थी।
सही विकल्प चुनें: (अ) केवल 1 और 2 (ब) केवल 2 और 3 (स) केवल 1 और 3 (द) 1, 2 और 3
प्रश्न 33:
चित्तौड़ के जैन कीर्तिस्तंभ के लेख (13वीं सदी) के संबंध में सही कथन चुनिए:
(अ) इन तीनों लेखों का संबंध चित्तौड़ के जैन कीर्तिस्तंभ से है, क्योंकि तीनों में स्तंभ के स्थापत्यकर्ता साहु जीजा तथा उनके वंश का विवरण मिलता है।
(ब) यद्यपि इनमें कहीं संवत अंकित नहीं मिलता, फिर भी इनके समकालीन लेखों के आधार पर इनका समय 13वीं सदी माना जाता है।
(स) इन लेखों को यदि चित्तौड़ के वि.सं. 1357 के लेख के साथ पढ़ते हैं तो ऐसा प्रतीत होता है कि चित्तौड़ के जैन-कीर्तिस्तंभ का निर्माण 13वीं सदी में जीजा के द्वारा करवाया गया था।
(द) उपर्युक्त सभी कथन सत्य हैं।
प्रश्न 34:
उपरमाल (डूंगरपुर) की प्रशस्ति (1404 ई.) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उपरमाल से प्राप्त यह प्रशस्ति दिगंबर जैन गोदिया के अध्यावध मंदिर में लगी हुई थी और इसे प्राकृत भाषा में पद्य रूप से लिखा गया है।
2. इस प्रशस्ति से यह ज्ञात होता है कि डूंगरपुर के आड़ादू गुहिलवंशियों की शाखा के राजा मेवाड़ के गुहिलवंशीय राजा बाप्पा, खुमाण, भैरव, बैरीसिंह, पद्महसिंह और जैत्रसिंह के पुत्र सोहड़देव के वंशज हैं।
सही विकल्प चुनें: (अ) केवल 1 (ब) केवल 2 (स) 1 और 2 दोनों (द) न तो 1, न ही 2
प्रश्न 35:
कोटसोलंकीय का लेख (1418 ई.) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह लेख देसुरी गाँव के समीप स्थित कोटसोलंकीय के एक जीर्ण-शीर्ण मंदिर में लगा हुआ है।
2. इस लेख से यह प्रमाणित होता है कि गोड़वाड़ क्षेत्र को महाराणा लाखा ने जीता था।
3. इस लेख से यह भी ज्ञात होता है कि महाराणा लाखा वि.सं. 1475 (1418 ई.) तक जीवित थे, जिससे ख्यातों में दी गई लाखा की मृत्यु-तिथि (वि.सं. 1454) असत्य प्रमाणित होती है।
सही विकल्प चुनें: (अ) केवल 1 और 2 (ब) केवल 2 और 3 (स) केवल 1 और 3 (द) 1, 2 और 3
प्रश्न 36:
भुंगी ऋषि शिलालेख (1428 ई.) के संदर्भ में सही कथन कौन-सा है?
(अ) यह लेख एकलिंगजी (उदयपुर) से कुछ दूरी पर भुंगी ऋषि नामक स्थान पर तिकारे (तीन प्रवेश द्वार वाला भवन) में लगा हुआ है।
(ब) इसकी रचना कविराज वाणिविलास योगीश्वर ने की थी और सूत्रधार हाड़ा के पुत्र फना ने इसे उत्कीर्ण किया था।
(स) इस लेख में महाराणा मोकल द्वारा अपने धार्मिक गुरु की आज्ञा से अपनी बूढ़ी गौतमीबिका की मुक्ति के लिए श्रृंग ऋषि के पवित्र स्थान पर एक कुंड बनवाने तथा मोकल द्वारा फिरोज खान (नागौर) व जेहमद (गुजरात) से युद्ध कर उन्हें परास्त करने का उल्लेख है।
(द) उपर्युक्त सभी कथन सत्य हैं।
प्रश्न 37:
रणकपुर प्रशस्ति (1439 ई.) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह प्रशस्ति रणकपुर के चौमुखा मंदिर के बाएं स्तम्भ पर लगे हुए पत्थर पर उत्कीर्ण है, जिसमें नागरी लिपि तथा संस्कृत भाषा का गद्य प्रयुक्त किया गया है।
2. इस प्रशस्ति के द्वारा हमें मेवाड़ के राजवंश का (बाप्पा से कुंभा तक की वंसवली) तथा इसके शिल्पियों का परिचय मिलता है, और इसमें बाप्पा को गुहिल का पुत्र लिखा गया है।
3. इस प्रशस्ति से यह स्पष्ट होता है कि बाप्पा और कालभोज दो अलग-अलग व्यक्ति थे, और इसमें 'धरणा' श्रेष्ठि (बढ़े व्यापारी) के पूर्वजों तथा उसके पुत्रों का ज्ञान भी मिलता है, जहाँ 'णाणक' शब्द का प्रयोग मुद्रा (सिक्के) के लिए हुआ है।
सही विकल्प चुनें: (अ) केवल 1 और 2 (ब) केवल 2 और 3 (स) केवल 1 और 3 (द) 1, 2 और 3
प्रश्न 38:
कीर्तिस्तंभ प्रशस्ति (1460 ई.) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह प्रशस्ति चित्तौड़ के कीर्तिस्तंभ की कई शिलाओं पर थी (फिलहाल दो ही सुरक्षित हैं) जिसके रचयिता अत्रि और उनके पुत्र महेश भट्ट थे।
2. इस प्रशस्ति में कुंभा द्वारा मांडव्यपुर (मंडोर) से हनुमान की मूर्ति लाने और 1515 वि.सं. में उसकी स्थापना दुर्ग के मुख्य द्वार पर करने तथा सपादलक्ष, नाराणा, बसंतपुर और आबू जीतने का वर्णन है।
3. इसमें कुंभा की उपाधियों (दानगुरु, राजगुरु, शेलगुरु) तथा उनके द्वारा रचित ग्रंथों (चंडीशतक, गीतगोविन्द की टीका, संगीतराज आदि) का उल्लेख है और इसमें कुंभा द्वारा मालवा और गुजरात की सेनाओं को परास्त करने का वर्णन (श्लोक 179 में) मिलता है।
सही विकल्प चुनें: (अ) केवल 1 और 2 (ब) केवल 2 और 3 (स) केवल 1 और 3 (द) 1, 2 और 3
प्रश्न 39:
कुम्भलगढ़ का शिलालेख (1460 ई.) के संबंध में असत्य कथन को पहचानिए:
(अ) यह शिलालेख पाँच शिलाओं पर उत्कीर्ण था (वर्तमान में उदयपुर संग्रहालय में सुरक्षित) जिसकी पहली, दूसरी, तीसरी और चौथी शिलाएं ही सुरक्षित हैं।
(ब) पहली शिला में जनजीवन और तीर्थ स्थान का वर्णन है, दूसरी में बाप्पा को ब्राह्मण वंशीय (विप्रवंशीय) बताया गया है, और तीसरी में बाप्पा को वंश प्रवर्तक तथा गुहिल को बाप्पा का पुत्र बताया गया है।
(स) इस शिलालेख के रचयिता डॉ. गोपीनाथ शर्मा ने महेश भट्ट को माना है, जबकि डॉ. जी.एच. ओझा ने इसके रचयिता कान व्यास को माना है।
(द) इस शिला में अलाउद्दीन खिलजी के मेवाड़ आक्रमण के समय महारावल रत्नसिंह की मृत्यु के बाद लक्ष्मणसिंह का अपने सात पुत्रों सहित वीरगति को प्राप्त होने तथा हम्मीर द्वारा चेलावाट जीतने का वर्णन है।
प्रश्न 40:
घोसुंडी की बावड़ी का लेख (1504 ई.) के संदर्भ में सही कथन चुनिए:
(अ) इस प्रशस्ति में महाराणा रायमल की रानी श्रृंगारदेवी (जो मारवाड़ के शासक जोधा की पुत्री थीं) के द्वारा उक्त बावड़ी के बनवाए जाने का उल्लेख है।
(ब) इस प्रशस्ति के रचयिता महेश्वर नामक कवि थे।
(स) उपर्युक्त दोनों (अ) और (ब) कथन सत्य हैं।
(द) यह लेख महाराणा कुंभा के समय का है।
राजस्थान इतिहास — प्रश्न 1 से 40 पूर्ण
अध्याय 1: राजस्थान के इतिहास के स्त्रोत
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