अध्याय 6: हाशिए से निपटना
सम्पूर्ण अध्याय नोट्स एवं बोर्ड परीक्षा मॉडल प्रश्न-पत्र (हल सहित)
1. हाशिए से निपटने और न्याय पाने के उपाय
पिछले अध्याय में हमने समझा कि कैसे कुछ समुदायों (जैसे आदिवासी, दलित, अल्पसंख्यक और महिलाएं) को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक कारणों से समाज के हाशिए पर धकेल दिया जाता है। लेकिन एक जीवंत लोकतंत्र में किसी भी समूह को हमेशा उपेक्षित नहीं छोड़ा जा सकता। हमारे देश में हाशिए पर मौजूद इन समूहों को मुख्यधारा में लाने, अन्याय रोकने और उनके हितों की रक्षा के लिए संविधान और सरकार ने कई ठोस कदम उठाए हैं।
2. मौलिक अधिकार और सामाजिक न्याय
भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकार हाशिए पर स्थित वर्गों के लिए सबसे सशक्त सुरक्षा कवच हैं:
- समानता का अधिकार: कानून के समक्ष प्रत्येक नागरिक समान है। जाति, धर्म, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव वर्जित है और अस्पृश्यता (छुआछूत) को एक दंडनीय अपराध घोषित किया गया है।
- शोषण के विरुद्ध अधिकार: इसके अंतर्गत किसी भी व्यक्ति से बेगार (जबरन बिना वेतन काम कराना), बंधुआ मजदूरी, मानव तस्करी और बाल मजदूरी करवाना पूर्णतः गैरकानूनी है।
- धार्मिक स्वतंत्रता एवं सांस्कृतिक अधिकार: अल्पसंख्यकों को अपनी विशिष्ट भाषा, लिपि और संस्कृति को बनाए रखने तथा अपने शिक्षण संस्थान स्थापित व संचालित करने का पूर्ण अधिकार प्राप्त है।
3. कानून जो भेदभाव और हिंसा से बचाते हैं
संवैधानिक मूल्यों को व्यावहारिक रूप से लागू करने के लिए संसद ने कठोर वैधानिक प्रावधान बनाए हैं:
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989
यह कानून विशेष रूप से दलितों और आदिवासियों के विरुद्ध होने वाली हिंसा, उत्पीड़न और अपमान को रोकने के लिए बनाया गया था।
- यदि कोई व्यक्ति इन वर्गों के लोगों को अपमानित करता है, उनकी भूमि पर अवैध कब्जा करता है या शारीरिक अत्याचार करता है, तो उसके लिए कठोर कारावास और गैर-जमानती सजा का प्रावधान है।
- यह अधिनियम यह सुनिश्चित करता है कि कमजोर वर्ग समाज में आत्मसम्मान और बिना किसी भय के रह सकें।
4. हाशिए के समूहों के लिए विशेष प्रावधान और आरक्षण
हाशिए पर स्थित वर्गों को विकास के समान अवसर प्रदान करने हेतु राज्य द्वारा सकारात्मक कदम (Affirmative Action) उठाए गए हैं:
• आरक्षण (Reservation) नीति
अनुसूचित जातियों (SC), अनुसूचित जनजातियों (ST) और अन्य पिछड़े वर्गों (OBC) के लिए उच्च शिक्षण संस्थानों और सरकारी सेवाओं में सीटें आरक्षित की जाती हैं, जिससे शासन-प्रशासन में उनका उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके।
• कल्याणकारी योजनाएँ एवं छात्रवृत्तियाँ
इन वर्गों के विद्यार्थियों के लिए विशेष छात्रवृत्तियाँ (Scholarships), निःशुल्क छात्रावास, और रियायती अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जाती है ताकि आर्थिक विपन्नता उनकी शिक्षा में बाधक न बने।
RBSE कक्षा 8 बोर्ड परीक्षा अभ्यास प्रश्न-पत्र
विषय: सामाजिक और राजनीतिक जीवन - III | अध्याय 6: हाशिए से निपटना
पूर्णांक: 25 अंक | समय: 45 मिनटखंड 'अ' : बहुविकल्पीय प्रश्न (4 × 1 = 4 अंक)
प्र.1 संविधान के अनुसार देश के सभी नागरिकों को कौन-सा अधिकार यह गारंटी देता है कि कानून के समक्ष सब समान हैं?
(अ) स्वतंत्रता का अधिकार (ब) समानता का अधिकार (स) शोषण के विरुद्ध अधिकार (द) संपत्ति का अधिकार
✔ उत्तर: (ब) समानता का अधिकार
प्र.2 अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम किस वर्ष पारित किया गया था?
(अ) 1950 में (ब) 1989 में (स) 2005 में (द) 2011 में
✔ उत्तर: (ब) 1989 में
प्र.3 भारतीय संविधान में अस्पृश्यता (छुआछूत) की प्रथा को क्या घोषित किया गया है?
(अ) एक कानूनी और दंडनीय अपराध (ब) एक सामान्य परंपरा (स) धार्मिक स्वतंत्रता का हिस्सा (द) वैकल्पिक नियम
✔ उत्तर: (अ) एक कानूनी और दंडनीय अपराध
प्र.4 हाशिए के समूहों को शिक्षा और रोजगार में आगे बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा कौन-सी मुख्य व्यवस्था की जाती है?
(अ) करों में वृद्धि (ब) आरक्षण और छात्रवृत्ति की सुविधा (स) घुमंतू जीवन को बढ़ावा (द) उद्योगों पर प्रतिबंध
✔ उत्तर: (ब) आरक्षण और छात्रवृत्ति की सुविधा
खंड 'ब' : अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (4 × 1 = 4 अंक)
प्र.5 'अत्याचार निवारण अधिनियम, 1989' मुख्य रूप से किन समुदायों की सुरक्षा के लिए बनाया गया है?
उत्तर: अनुसूचित जातियों (SCs) और अनुसूचित जनजातियों (STs) के संरक्षण हेतु।
प्र.6 भारतीय संविधान का कौन-सा अधिकार देश में छुआछूत जैसी कुप्रथा को गैरकानूनी बनाता है?
उत्तर: समानता का अधिकार (अनुच्छेद 17)।
प्र.7 सरकार द्वारा हाशिए के विद्यार्थियों के लिए चलाई जाने वाली दो मुख्य सहायता प्रणालियों के नाम लिखिए।
उत्तर: 1. छात्रवृत्तियाँ (Scholarships) और 2. निःशुल्क छात्रावास सुविधा।
प्र.8 आदिवासी और दलित लोग अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कानून का सहारा क्यों लेते हैं?
उत्तर: ताकि उन्हें सामाजिक भेदभाव, हिंसा और आर्थिक शोषण से वैधानिक सुरक्षा और न्याय मिल सके।
खंड 'स' : लघु उत्तरीय प्रश्न (3 × 3 = 9 अंक)
प्र.9 अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की आवश्यकता क्यों पड़ी?
- दलित और आदिवासी समुदायों के विरुद्ध होने वाले जातिगत अपमान, हिंसा और शारीरिक अत्याचारों पर प्रभावी रोक लगाने के लिए।
- दबंगों द्वारा इनकी पारंपरिक जमीनों पर अवैध कब्जों को रोकने और बेदखली से सुरक्षा प्रदान करने हेतु।
- कमजोर वर्गों को कानूनी संरक्षण देकर उनके भीतर सुरक्षा और आत्मविश्वास की भावना जगाने के लिए।
प्र.10 मौलिक अधिकार हाशिए के समूहों के लिए किस प्रकार सुरक्षा का कार्य करते हैं?
प्र.11 सरकार द्वारा हाशिए के समूहों को मुख्यधारा में लाने के लिए कौन-से प्रयास किए जा रहे हैं?
- उच्च शिक्षण संस्थानों और सरकारी सेवाओं में आरक्षण की व्यवस्था करना।
- स्वरोजगार हेतु रियायती ऋण, छात्रवृत्तियाँ और विशेष आवासीय विद्यालयों (जैसे एकलव्य विद्यालय) का संचालन करना।
खंड 'द' : दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (2 × 4 = 8 अंक)
प्र.12 हाशिए के समूहों के उत्थान के लिए भारतीय संविधान और कानूनों में क्या उपाय किए गए हैं?
- संवैधानिक समता: अनुच्छेद 14, 15 और 16 के जरिए किसी भी नागरिक के साथ जाति या मूलवंश के आधार पर भेदभाव को असंवैधानिक घोषित किया गया है।
- अस्पृश्यता उन्मूलन: अनुच्छेद 17 के तहत छुआछूत का किसी भी रूप में आचरण पूर्णतः प्रतिबंधित और संज्ञेय अपराध बनाया गया है।
- कठोर वैधानिक संरक्षण: 1989 का अत्याचार निवारण अधिनियम विशेष अदालतों और त्वरित न्याय की व्यवस्था करता है।
- राजनीतिक आरक्षण: संसद (लोकसभा) और राज्य विधानसभाओं में इन समुदायों के लिए सीटों का आरक्षण सुनिश्चित किया गया है ताकि नीतियां बनाते समय उनका प्रतिनिधित्व रहे।
प्र.13 आरक्षण की व्यवस्था हाशिए के समुदायों के उत्थान में किस प्रकार सहायक है?
- ऐतिहासिक असमानता का निवारण: सदियों से शिक्षा और संसाधनों से वंचित रहे समुदायों को मुख्यधारा में बराबरी का स्तर दिलाने का यह एक प्रभावी साधन है।
- प्रशासन में हिस्सेदारी: आरक्षण के माध्यम से इन वर्गों के युवा उच्च प्रशासनिक सेवाओं, न्यायपालिका और तकनीकी क्षेत्रों में पहुँचकर नीति-निर्माण का हिस्सा बनते हैं।
- आर्थिक व सामाजिक सुदृढ़ीकरण: स्थायी रोजगार और उच्च शिक्षा से इन वर्गों में आर्थिक आत्मनिर्भरता आती है तथा सामाजिक प्रतिष्ठा में ठोस वृद्धि होती है।

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