RBSE Class 8 History Chapter 5 Notes & Model Paper 2027: जब जनता बगावत करती है (1857 और उसके बाद)

 




RBSE कक्षा 8 • इतिहास (हमारे अतीत - III)

अध्याय 5: जब जनता बगावत करती है (1857 और उसके बाद)

संपूर्ण अध्याय का सरल सारांश, मुख्य बिंदु एवं बोर्ड परीक्षा 2027 हेतु महत्वपूर्ण मॉडल प्रश्न-पत्र

नोट: यह अध्ययन सामग्री राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) के नवीनतम पाठ्यक्रम के अनुसार कक्षा 8 के विद्यार्थियों एवं प्रतियोगी परीक्षाओं (REET, RPSC) की नींव मजबूत करने के लिए तैयार की गई है।

1. प्रस्तावना: 1857 का महान विद्रोह

पिछले अध्यायों में हमने देखा कि किस प्रकार ब्रिटिश शासन ने भारत के राजाओं, नवाबों, किसानों, शिल्पकारों और आदिवासियों की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति को प्रभावित किया। विभिन्न वर्गों के शोषण और दमनकारी नीतियों के फलस्वरूप सन 1857 में एक संगठित सशस्त्र जन-आंदोलन उठ खड़ा हुआ, जिसे 'प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम' या '1857 की क्रांति' कहा जाता है। इसने भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी की सत्ता को झकझोर दिया था।

2. नवाबों की सत्ता का हनन और असंतोष

  • रियासतों का विलय: लॉर्ड डलहौजी की हड़प नीति (Doctrine of Lapse) के तहत सतारा, नागपुर और झाँसी जैसी रियासतों को ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लिया गया।
  • अवध का अधिग्रहण (1856): 1856 में कुशासन का आरोप लगाकर नवाब वाजिद अली शाह को गद्दी से हटा दिया गया, जिससे अवध की जनता और सेना में गहरा रोष फैल गया।
  • पेंशन व उपाधियों की समाप्ति: पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र नाना साहब की पेंशन बंद कर दी गई तथा अंतिम मुगल बादशाह के बाद उनके वंशजों को लाल किला खाली करने का आदेश दिया गया।

3. किसान एवं सिपाहियों की समस्याएँ

  • कृषि व्यवस्था पर प्रभाव: अत्यधिक लगान तथा राजस्व वसूली के कठोर नियमों से किसान साहूकारों के कर्जजाल में फँस गए और उनकी पुश्तैनी जमीनें हाथ से निकल गईं।
  • सैनिकों का असंतोष: ब्रिटिश सेना के भारतीय सिपाहियों को यूरोपीय सैनिकों की अपेक्षा कम वेतन, निम्न भत्ते और नस्लीय भेदभाव का सामना करना पड़ता था।
  • धार्मिक मान्यताएँ: तत्कालीन सामाजिक मान्यताओं में समुद्र यात्रा को धर्म के विरुद्ध माना जाता था। 1856 के जनरल सर्विस एनलिस्टमेंट एक्ट के तहत नए सैनिकों के लिए आवश्यकता पड़ने पर समुद्र पार जाना अनिवार्य कर दिया गया।

4. तात्कालिक कारण: एनफील्ड राइफल और चर्बी वाले कारतूस

विद्रोह की तात्कालिक चिंगारी सेना में शामिल की गई नई एनफील्ड राइफल से फूटी। इसके कारतूस पर सील के रूप में गाय और सूअर की चर्बी के लेप की बात सामने आई। प्रयोग से पहले कारतूस के सिरे को दाँत से काटना पड़ता था, जिससे हिंदू और मुस्लिम दोनों सैनिकों की धार्मिक भावनाएँ आहत हुईं और उन्हें लगा कि यह धर्म भ्रष्ट करने का षड्यंत्र है।

5. क्रांति का प्रसार: मेरठ से दिल्ली तक

  • मंगल पांडे का बलिदान: 29 मार्च 1857 को बैरकपुर छावनी (बंगाल) में 34वीं नेटिव इन्फैंट्री के सैनिक मंगल पांडे ने चर्बीयुक्त कारतूस के विरोध में अंग्रेज अफसरों पर गोली चलाई। उन्हें 8 अप्रैल 1857 को फाँसी दे दी गई।
  • मेरठ विद्रोह: 9 मई 1857 को नए कारतूसों के बहिष्कार पर 85 सैनिकों को लंबी जेल की सजा दी गई। अगले ही दिन, 10 मई 1857 को सैनिकों ने जेल तोड़कर साथियों को मुक्त कराया और अंग्रेजी छावनी पर कब्जा कर दिल्ली की ओर कूच किया।
  • बहादुर शाह जफर का नेतृत्व: 11 मई को दिल्ली पहुँचकर सिपाहियों ने 82 वर्षीय मुगल सम्राट बहादुर शाह द्वितीय 'जफर' को हिंदुस्तान का नेता घोषित कर दिया, जिससे विद्रोह को एक सर्वमान्य वैधता मिल गई।

6. क्रांति के प्रमुख केंद्र एवं नेतृत्वकर्ता

स्थान प्रमुख नेतृत्वकर्ता
झाँसी रानी लक्ष्मीबाई
कानपुर नाना साहब एवं तात्या टोपे
लखनऊ बेगम हजरत महल एवं बिरजिस कादिर
जगदीशपुर (बिहार) कुंवर सिंह
बरेली खान बहादुर खान
फैजाबाद मौलवी अहमदुल्लाह शाह

7. विद्रोह का दमन एवं परिणाम

ब्रिटिश हुकूमत ने भारी सैन्य शक्ति मंगाकर विद्रोह को क्रूरतापूर्वक दबा दिया। सितंबर 1857 में दिल्ली पर पुनः अधिकार कर लिया गया। बहादुर शाह जफर को बंदी बनाकर रंगून (म्यांमार) निर्वासित किया गया, जहाँ 1862 में उनका देहांत हो गया। जून 1858 में रानी लक्ष्मीबाई वीरगति को प्राप्त हुईं और अप्रैल 1859 में तात्या टोपे को फाँसी दी गई।

8. 1857 के बाद प्रशासनिक परिवर्तन

  • ब्रिटिश ताज का प्रत्यक्ष शासन: अगस्त 1858 के 'गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट' द्वारा ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन समाप्त कर भारत का नियंत्रण सीधे ब्रिटिश क्राउन (महारानी विक्टोरिया) के अधीन कर दिया गया।
  • वायसराय का पद: गवर्नर-जनरल के पद को बदलकर 'वायसराय' किया गया (प्रथम वायसराय: लॉर्ड कैनिंग)।
  • रियासतों को सुरक्षा: भारतीय राजाओं को विश्वास दिलाया गया कि भविष्य में उनके राज्य छीने नहीं जाएँगे और उन्हें दत्तक पुत्र गोद लेने का अधिकार रहेगा।
  • सेना का पुनर्गठन: अवध व बिहार के सैनिकों का अनुपात घटाकर गोरखा, सिख और पठान सैनिकों की संख्या बढ़ाई गई।

RBSE कक्षा 8 बोर्ड परीक्षा - 2027

विषय: सामाजिक विज्ञान (इतिहास) • मॉडल प्रश्न पत्र

अध्याय 5: जब जनता बगावत करती है | पूर्णांक: 25 | समय: 45 मिनट

खंड 'अ' : बहुविकल्पीय प्रश्न (प्रत्येक 1 अंक)

  1. 1857 की क्रांति के समय भारत का गवर्नर-जनरल कौन था?
    (अ) लॉर्ड डलहौजी    (ब) लॉर्ड कैनिंग    (स) लॉर्ड वेलेजली    (द) लॉर्ड कॉर्नवालिस
    उत्तर: (ब) लॉर्ड कैनिंग
  2. मंगल पांडे को किस छावनी में फाँसी दी गई थी?
    (अ) मेरठ छावनी    (ब) दिल्ली छावनी    (स) बैरकपुर छावनी    (द) कानपुर छावनी
    उत्तर: (स) बैरकपुर छावनी
  3. झाँसी में 1857 के विद्रोह का नेतृत्व किसने किया था?
    (अ) बेगम हजरत महल    (ब) रानी लक्ष्मीबाई    (स) नाना साहब    (द) कुंवर सिंह
    उत्तर: (ब) रानी लक्ष्मीबाई
  4. अंतिम मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को अंग्रेजों ने बंदी बनाकर कहाँ भेजा تھا?
    (अ) अंडमान    (ब) रंगून (म्यांमार)    (स) कलकत्ता    (द) लाहौर
    उत्तर: (ब) रंगून (म्यांमार)

खंड 'ब' : अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (प्रत्येक 1 अंक)

प्र.5 1857 के विद्रोह का तात्कालिक कारण क्या था?
उत्तर: नई एनफील्ड राइफल के कारतूसों पर गाय व सूअर की चर्बी का लेप होने की सूचना, जिन्हें राइफल में भरने से पहले मुँह से काटना पड़ता था।

प्र.6 अंग्रेजों ने किस वर्ष 'अवध' को कुशासन का आरोप लगाकर अपने नियंत्रण में लिया था?
उत्तर: वर्ष 1856 में।

प्र.7 मेरठ के सैनिकों ने बगावत करके दिल्ली की ओर किस तिथि को कूच किया था?
उत्तर: 10 मई 1857 को।

प्र.8 1858 के अधिनियम के बाद भारत का शासन किसके हाथों में चला गया?
उत्तर: सीधे ब्रिटिश क्राउन (महारानी विक्टोरिया) के अधीन।

खंड 'स' : लघु उत्तरीय प्रश्न (प्रत्येक 3 अंक)

प्र.9 1857 के संग्राम में भारतीय सैनिकों के असंतोष के मुख्य कारण क्या थे?
उत्तर: 1. ब्रिटिश सिपाहियों की तुलना में भारतीय सैनिकों को अत्यंत कम वेतन और भत्ते दिए जाते थे तथा उनके साथ नस्लीय दुर्व्यवहार होता था।
2. 1856 के नए सेवा भर्ती नियम के तहत आवश्यकता पड़ने पर समुद्र पार ड्यूटी पर जाना अनिवार्य कर दिया गया था, जो तत्कालीन धार्मिक परंपराओं के विरुद्ध था।
3. नए चर्बी वाले कारतूसों के अनिवार्य प्रयोग से सैनिकों को लगा कि ब्रिटिश सरकार उनका धर्म नष्ट करना चाहती है।

प्र.10 1857 की क्रांति के बाद ब्रिटिश सरकार ने सैन्य संगठन में क्या बदलाव किए?
उत्तर: 1. यूरोपीय सैनिकों की संख्या बढ़ाई गई और भारतीय सिपाहियों का अनुपात घटाया गया।
2. अवध, बिहार और मध्य भारत के सैनिकों की भर्ती सीमित कर सिख, गोरखा और पठान सैनिकों की संख्या में वृद्धि की गई।
3. तोपखाने और प्रमुख सामरिक हथियारों का संपूर्ण नियंत्रण केवल यूरोपीय अफसरों के हाथों में रखा गया।

प्र.11 झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष क्यों चुना?
उत्तर: राजा गंगाधर राव के निधन के पश्चात डलहौजी की 'हड़प नीति' के अंतर्गत अंग्रेजों ने रानी के दत्तक पुत्र आनंद राव (दामोदर राव) को वैध उत्तराधिकारी स्वीकार करने से मना कर दिया और झाँसी का ब्रिटिश राज्य में विलय कर लिया। अपने स्वाभिमान और राज्य की रक्षा के लिए रानी लक्ष्मीबाई ने संघर्ष का मार्ग चुना।

खंड 'द' : दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (प्रत्येक 4 अंक)

प्र.12 1857 की क्रांति के लिए उत्तरदायी प्रमुख कारणों की वर्गवार विवेचना कीजिए।
उत्तर:
(क) राजाओं व नवाबों का असंतोष: डलहौजी की विलय नीति के अंतर्गत कई देशी रियासतें छीन ली गईं, मुगल शासक का दर्जा घटाया गया और नाना साहब जैसी विभूतियों की पेंशन बंद कर दी गई।
(ख) किसानों व जमींदारों की स्थिति: अत्यधिक भू-राजस्व और वसूली की अमानवीय नीतियों ने किसानों को निर्धन कर दिया। ऋण न चुका पाने के कारण उनकी ज़मीनें साहूकारों के हाथों बिक गईं।
(ग) सामाजिक व धार्मिक हस्तक्षेप: सती प्रथा निषेध, विधवा पुनर्विवाह अधिनियम और ईसाई मिशनरियों के बढ़ते प्रभाव से भारतीय समाज को अपनी संस्कृति पर खतरा महसूस हुआ।
(घ) सैनिक असंतोष: चर्बी वाले कारतूसों की घटना ने बारूद में चिंगारी का काम किया और व्यापक विद्रोह भड़क उठा।

प्र.13 1857 के विद्रोह के प्रमुख परिणाम और दूरगामी प्रभाव क्या रहे?
उत्तर:
1. कंपनी शासन की समाप्ति: भारत से ईस्ट इंडिया कंपनी का एकाधिकार पूरी तरह समाप्त कर शासन की बागडोर महारानी विक्टोरिया और ब्रिटिश संसद को सौंप दी गई।
2. रियासतों के प्रति नीति: राजाओं को भरोसा दिलाया गया कि उनके राज्य नहीं छीने जाएँगे और उन्हें गोद लेने की अनुमति होगी।
3. सामाजिक-धार्मिक अहस्तक्षेप: ब्रिटिश सरकार ने घोषणा की कि वे भारतीयों के रीति-रिवाजों और आस्थाओं में सीधे हस्तक्षेप से बचेंगे।
4. राष्ट्रीय चेतना का उदय: 1857 के विद्रोह ने आने वाली पीढ़ियों में ब्रिटिश हुकूमत के विरुद्ध राष्ट्रीय स्वाधीनता आंदोलन की मजबूत वैचारिक पृष्ठभूमि तैयार की।

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