RBSE Class 8 Hamara Rajasthan Chapter 4 | किसान एवं प्रजामंडल आंदोलन | Kisan & Prajamandal Movement | Model Paper 2027

🌾 राजस्थान अध्ययन : हमारा राजस्थान

कक्षा 8

अध्याय 4: राजस्थान में किसान एवं प्रजामंडल आंदोलन

📚 RBSE अध्ययन सामग्री एवं मॉडल प्रश्न पत्र — 2027

पूर्णांक: 25 अंक   |   समय: 45 मिनट
1. राजस्थान में किसान आंदोलन की पृष्ठभूमि
  • सामंती अत्याचार: 19वीं और 20वीं सदी के दौरान राजस्थान की रियासतों और जागीरदारों (थिकानेदारों) द्वारा किसानों पर भारी मात्रा में लगान (भू-राजस्व), लाग्-बाग (अनेक प्रकार के कर) और बेगार (बिना वेतन के काम करवाना) थोपी गई थी।
  • जागृति का कारण: इन अमानवीय अत्याचारों, शोषण और अत्यधिक करों से तंग आकर किसानों ने अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर आवाज उठानी शुरू की, जिसे राजस्थान का किसान आंदोलन कहा जाता है।
  • प्रमुख किसान आंदोलन: मेवाड़ का बिजोलिया और बेंगू किसान आंदोलन, बूंदी का बूंदी/बरड़ किसान आंदोलन, और शेखावाटी (सीकर-हर्षोदा) का किसान आंदोलन प्रमुख थे।
2. बिजोलिया किसान आंदोलन (भारत का सबसे लंबा किसान आंदोलन)
  • परिचय: बिजोलिया (वर्तमान में भीलवाड़ा जिले में) मेवाड़ रियासत का एक 'ए श्रेणी' का ठिकाना था। यहाँ के अधिकांश किसान 'धाकड़' जाति के थे।
  • शोषण: किसानों से लगभग 84 प्रकार की लाग्-बाग (कर) वसूले जाते थे, जिससे उनकी स्थिति दयनीय हो गई थी।
  • आंदोलन के चरण: यह आंदोलन लगभग 44 वर्षों (1897 से 1941 तक) तक चला और यह भारत का सबसे लंबा चलने वाला अहिंसक किसान आंदोलन था। इसे तीन चरणों में बांटा गया है:
1. प्रथम चरण (1897-1915)

किसानों ने शुरुआत में एकत्रित होकर महाराणा के पास अपनी शिकायत भेजी। इस चरण का नेतृत्व साधू सीताराम दास, नानजी पटेल और ठाकरी पटेल ने किया।

2. द्वितीय चरण (1915-1923)

इस चरण में राजस्थान के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी विजय सिंह पथिक (भूप सिंह) ने आंदोलन की कमान संभाली। उन्होंने 'उड़िया पंथ' की स्थापना की और 'राजस्थान केसरी' व 'नवीन राजस्थान' अखबारों के माध्यम से बिजोलिया की समस्याओं को देश भर में पहुँचाया।

किसानों ने 'बिना लगान दिए' (करबंदी) सत्याग्रह किया। इस दौरान मणिक्यलाल वर्मा भी सक्रिय रूप से जुड़े।

3. तृतीय चरण (1923-1941)

इस अंतिम चरण का नेतृत्व जमनालाल बजाज और हरिभाऊ उपाध्याय ने किया। अंत में 1941 में मेवाड़ सरकार और किसानों के बीच समझौता हुआ, जिसके तहत किसानों की जमीनें उन्हें वापस लौटाई गईं और कर समाप्त किए गए।

3. बेंगू और बूंदी (बरड़) किसान आंदोलन
बेंगू किसान आंदोलन

बेंगू ठिकाना भी मेवाड़ रियासत के अंतर्गत था। 1921 में मेनाल (बरड़) नामक स्थान पर किसानों ने अत्यधिक लगान और बेगार के खिलाफ आंदोलन शुरू किया। रामनारायण चौधरी के नेतृत्व में यह आंदोलन हुआ।

इस दौरान 13 जुलाई 1923 को हुए दमन चक्र में रुपजी और कृपाजी धाकड़ नामक किसान पुलिस की गोलीबारी से शहीद हो गए।

बूंदी (बरड़) किसान आंदोलन

बूंदी रियासत के बरड़ क्षेत्र में भी किसानों पर अत्याचार बढ़ रहे थे। पंडित नूराम शर्मा के नेतृत्व में यहाँ के किसानों ने लगान के खिलाफ आवाज उठाई।

2 अप्रैल 1923 को डाबी नामक स्थान पर एक किसान सभा पर पुलिस ने अंधाधुंध गोलियाँ चलाईं, जिसमें नैनूराम शर्मा के सहयोगी नानका जी भील झंडा गीत गाते हुए शहीद हो गए।

4. प्रजामंडल आंदोलन और राजनीतिक जागृति
प्रजामंडल का अर्थ

1920 के दशक के बाद देश में राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम तेज हुआ। राजस्थान में राजाओं के कुशासन और उत्तरदायी शासन (Responsible Government) की स्थापना के लिए जो संगठन बने, उन्हें 'प्रजामंडल' कहा गया।

प्रमुख प्रजामंडलों की स्थापना
  1. जयपुर प्रजामंडल (1931): इसकी स्थापना सबसे पहले कपूरचंद पाटनी ने की थी, बाद में 1938 में जमनालाल बजाज और श्रीराम मिर्धा ने इसे पुनर्गठित किया।
  2. मारवाड़ प्रजामंडल (1934): जोधपुर में जय नारायण व्यास और अचूक लाल सर्राफ ने इसकी स्थापना की। इन्होंने मारवाड़ लोक परिषद के माध्यम से भी जनता को जागरूक किया।
  3. मेवाड़ प्रजामंडल (1938): उदयपुर में बलवंत सिंह मेहता और माणिक्यलाल वर्मा के प्रयासों से मेवाड़ प्रजामंडल की स्थापना हुई। इसके प्रथम अध्यक्ष बलवंत सिंह मेहता थे।
  4. बीकानेर प्रजामंडल (1936): मगाराम वैद्य ने बीकानेर प्रजामंडल की स्थापना की। उन्होंने बीकानेर से बाहर (कलकत्ता में रहकर) रियासत के कुशासन के खिलाफ पर्चे बांटे।
  5. कोटा प्रजामंडल (1939): इसकी स्थापना नैनूराम शर्मा और अभय सिंह ने की थी।
RBSE कक्षा 8 मॉडल प्रश्न पत्र - 2027

विषय: हमारा राजस्थान (कक्षा 8)

अध्याय 4: राजस्थान में किसान एवं प्रजामंडल आंदोलन

पूर्णांक: 25 अंक   |   समय: 45 मिनट

खंड 'अ' : बहुविकल्पीय प्रश्न

(प्रत्येक प्रश्न 1 अंक - कुल 4 अंक)

प्र.1 बिजोलिया किसान आंदोलन कितने वर्षों तक चलने वाला भारत का सबसे लंबा अहिंसक आंदोलन था?
(अ) 20 वर्ष    (ब) 30 वर्ष    (स) 44 वर्ष    (द) 55 वर्ष
उत्तर: (स) 44 वर्ष
प्र.2 बिजोलिया किसान आंदोलन के द्वितीय चरण में इसका नेतृत्व किसने संभाला था?
(अ) साधू सीताराम दास    (ब) विजय सिंह पथिक    (स) जमनालाल बजाज    (द) जय नारायण व्यास
उत्तर: (ब) विजय सिंह पथिक
प्र.3 बेंगू किसान आंदोलन के दौरान शहीद होने वाले किसान कौन थे?
(अ) नानका जी भील    (ब) रूपजी और कृपाजी धाकड़    (स) सागरमल गोपा    (द) जोरावर सिंह बारहठ
उत्तर: (ब) रूपजी और कृपाजी धाकड़
प्र.4 मारवाड़ प्रजामंडल की स्थापना 1934 में किसके द्वारा की गई थी?
(अ) माणिक्यलाल वर्मा    (ब) जय नारायण व्यास    (स) मगाराम वैद्य    (द) नैनूराम शर्मा
उत्तर: (ब) जय नारायण व्यास
खंड 'ब' : अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

(प्रत्येक प्रश्न 1 अंक - कुल 4 अंक)

प्र.5 बिजोलिया ठिकाना वर्तमान राजस्थान के किस जिले में स्थित था?
उत्तर: भीलवाड़ा जिले में।
प्र.6 बूंदी के डाबी किसान कांड में झंडा गीत गाते हुए कौन से किसान शहीद हुए थे?
उत्तर: नानका जी भील।
प्र.7 मेवाड़ प्रजामंडल की स्थापना किस वर्ष और किसके द्वारा की गई थी?
उत्तर: वर्ष 1938 में माणिक्यलाल वर्मा और बलवंत सिंह मेहता द्वारा।
प्र.8 'प्रजामंडल आंदोलनों' का मुख्य उद्देश्य क्या था?
उत्तर: राजाओं के कुशासन को समाप्त कर रियासतों में उत्तरदायी शासन की स्थापना करना और जनता के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना।
खंड 'स' : लघु उत्तरीय प्रश्न

(प्रत्येक प्रश्न 3 अंक - कुल 9 अंक)

प्र.9 बिजोलिया किसान आंदोलन के प्रथम चरण की प्रमुख विशेषताओं का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर:
  • यह चरण 1897 से 1915 के बीच चला था।
  • इसकी शुरुआत किसानों द्वारा जागीरदारों के 84 प्रकार के भारी करों और बेगार के विरोध में हुई थी।
  • इस चरण का नेतृत्व मुख्य रूप से साधू सीताराम दास, नानजी पटेल और ठाकरी पटेल ने किया था, जिन्होंने किसानों को एकजुट किया।
प्र.10 बेंगू और बूंदी किसान आंदोलनों में हुए दमन चक्र का संक्षेप में उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
  • बेंगू किसान आंदोलन: मेनाल में किसानों की सभा पर पुलिस ने अत्याचार किए, जिसमें 13 जुलाई 1923 को रूपजी और कृपाजी धाकड़ शहीद हो गए।
  • बूंदी (बरड़) किसान आंदोलन: 2 अप्रैल 1923 को डाबी में आयोजित किसान सभा पर पुलिस ने गोलियाँ चलाईं, जिसमें नानका जी भील शहीद हो गए।
प्र.11 मारवाड़ और बीकानेर प्रजामंडल के योगदान पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
  • मारवाड़ प्रजामंडल: जय नारायण व्यास के नेतृत्व में जोधपुर में राजनीतिक जागृति फैलाई और जनता को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया।
  • बीकानेर प्रजामंडल: मगाराम वैद्य ने बीकानेर रियासत के दमनकारी शासन के खिलाफ कलकत्ता में रहकर प्रजामंडल की गतिविधियाँ चलाईं।
खंड 'द' : दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

(प्रत्येक प्रश्न 4 अंक - कुल 8 अंक)

प्र.12 बिजोलिया किसान आंदोलन के विभिन्न चरणों का विस्तार से वर्णन कीजिए और बताइए कि यह आंदोलन भारतीय किसान आंदोलनों में क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर:
  • प्रथम चरण (1897-1915): साधू सीताराम दास के नेतृत्व में स्थानीय स्तर पर विरोध और महाराणा को आवेदन देना।
  • द्वितीय चरण (1915-1923): विजय सिंह पथिक का प्रवेश, 'राजस्थान केसरी' अखबार और 'उड़िया पंथ' के माध्यम से आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना।
  • तृतीय चरण (1923-1941): जमनालाल बजाज और हरिभाऊ उपाध्याय के प्रयासों से 1941 में समझौता होना और किसानों को राहत मिलना।
  • महत्व: यह 44 साल तक चलने वाला दुनिया का सबसे लंबा और पूरी तरह अहिंसक संगठित किसान आंदोलन था, जिसने देश के अन्य किसान आंदोलनों को एक नई दिशा दी।
प्र.13 राजस्थान में प्रजामंडल आंदोलनों के उदय के क्या कारण थे? प्रमुख प्रजामंडलों के योगदान का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
उदय के कारण:
  • राजाओं का निरंकुश शासन।
  • जनता पर अत्यधिक कर।
  • प्रेस और भाषण की स्वतंत्रता का अभाव।
  • देश में चल रहे राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन का प्रभाव।
प्रमुख योगदान:
  1. जयपुर प्रजामंडल: जमनालाल बजाज के नेतृत्व में सामाजिक सुधार और राजनीतिक अधिकार की माँग।
  2. मेवाड़ प्रजामंडल: माणिक्यलाल वर्मा के नेतृत्व में जनता को जागृत करना।
  3. कोटा प्रजामंडल: नैनूराम शर्मा द्वारा जन-आंदोलन का संचालन।

निष्कर्ष: इन प्रजामंडलों ने राजपूताना की रियासतों में तानाशाही शासन का विरोध कर अंततः आधुनिक लोकतांत्रिक राजस्थान के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया।

📌 परीक्षा उपयोगी बिंदु:

बिजोलिया किसान आंदोलन के तीन चरण, प्रमुख किसान नेता, बेंगू एवं बूंदी किसान आंदोलन, तथा राजस्थान के प्रमुख प्रजामंडलों और उनके नेताओं को विशेष रूप से याद करें।

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