RBSE Class 8 Social Science Chapter 8 Notes & Model Paper: कानून और सामाजिक न्याय (सम्पूर्ण हल सहित)
अध्याय 8: कानून और सामाजिक न्याय
सम्पूर्ण अध्याय नोट्स एवं बोर्ड परीक्षा मॉडल प्रश्न-पत्र (हल सहित)
1. कानून और सामाजिक न्याय की आवश्यकता
संसद कानून बनाती है और सरकार उन्हें लागू करती है। परंतु जब समाज में साधन-संपन्न व्यक्ति या औद्योगिक इकाइयाँ अधिक मुनाफा कमाने के लिए श्रमिकों, उपभोक्ताओं अथवा पर्यावरण का शोषण करने लगती हैं, तब विधि का प्राथमिक दायित्व कमजोर वर्गों को सुरक्षा प्रदान करना होता है। इसी व्यवस्था को 'कानून और सामाजिक न्याय' कहा जाता है।
2. बाजार में न्यूनतम वेतन की महत्ता
भारत में विशाल श्रमबल असंगठित क्षेत्रों, निर्माण परियोजनाओं और विनिर्माण इकाइयों में कार्यरत है:
- श्रमिकों की विवशता: अत्यधिक गरीबी और व्यापक बेरोजगारी के कारण मजदूर कम पारिश्रमिक पर भी कार्य करने को बाध्य हो जाते हैं, जिससे उनका आर्थिक शोषण होता है।
- न्यूनतम वेतन अधिनियम (Minimum Wages Act): यह कानून यह अनिवार्य करता है कि नियोक्ता किसी भी श्रमिक को सरकार द्वारा अधिसूचित न्यूनतम सीमा से कम मजदूरी नहीं दे सकता। इसे मुद्रास्फीति और जीवन-यापन की लागत के आधार पर समय-समय पर संशोधित किया जाता है।
3. श्रमिकों, उपभोक्ताओं और पर्यावरण के अधिकार
कानून केवल श्रम क्षेत्र तक सीमित न रहकर समाज के प्रत्येक पक्ष को विधिक सुरक्षा प्रदान करता है:
• कार्यस्थल पर सुरक्षा मानक
खतरनाक उद्योगों, खदानों व रासायनिक कारखानों में जीवन-सुरक्षा उपकरण (जैसे मास्क, हेलमेट, अग्निशामक यंत्र) उपलब्ध कराना तथा कार्य-दशाओं को सुरक्षित रखना नियोक्ताओं का विधिक कर्तव्य है।
• उपभोक्ता संरक्षण
मिलावट, घटिया निर्माण और भ्रामक विज्ञापनों से ग्राहकों के हितों की रक्षा हेतु उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम लागू किए गए हैं।
• पर्यावरण संरक्षण कानून
उद्योगों द्वारा औद्योगिक अपशिष्ट सीधे नदियों में बहाने या विषाक्त धुआँ वातावरण में छोड़ने पर रोक लगाने के लिए कठोर विधिक दंड तय किए गए हैं।
4. भोपाल गैस त्रासदी (1984): एक दर्दनाक सबक
कानूनों के ढीले क्रियान्वयन और सुरक्षा उपेक्षा का सबसे वीभत्स परिणाम भोपाल गैस त्रासदी है:
- घटना: 2 दिसंबर 1984 की रात भोपाल स्थित अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनी 'यूनियन कार्बाइड' के कीटनाशक संयंत्र से अत्यंत विषैली मिथाइल आइसोसाइनेट (MIC) गैस का रिसाव हुआ।
- प्रभाव: हजारों बेकसूर नागरिकों की असमय मृत्यु हुई और लाखों व्यक्ति जीवन भर के लिए असाध्य रोगों एवं दिव्यांगता के शिकार हुए।
- सबक: सुरक्षा मानकों की लागत घटाने की प्रवृत्ति मानव जीवन पर भारी पड़ती है। इस घटना के उपरांत भारत में पर्यावरण संरक्षण अधिनियम (1986) तथा कठोर औद्योगिक सुरक्षा मानक अस्तित्व में आए।
RBSE कक्षा 8 बोर्ड परीक्षा अभ्यास प्रश्न-पत्र
विषय: सामाजिक और राजनीतिक जीवन - III | अध्याय 8: कानून और सामाजिक न्याय
पूर्णांक: 25 अंक | समय: 45 मिनटखंड 'अ' : बहुविकल्पीय प्रश्न (4 × 1 = 4 अंक)
प्र.1 'न्यूनतम वेतन कानून' बनाने का मुख्य उद्देश्य समाज में किसे संरक्षण प्रदान करना है?
(अ) बड़े उद्योगपतियों को (ब) कामगारों और मजदूरों को (स) बहुराष्ट्रीय कंपनियों को (द) बड़े आयातकों को
✔ उत्तर: (ब) कामगारों और मजदूरों को
प्र.2 भारत की सबसे गंभीर औद्योगिक दुर्घटना 'भोपाल गैस त्रासदी' किस वर्ष घटित हुई थी?
(अ) 1975 में (ब) 1984 में (स) 1991 में (द) 2005 में
✔ उत्तर: (ब) 1984 में
प्र.3 भोपाल गैस त्रासदी के दौरान किस अत्यधिक विषैली गैस का रिसाव हुआ था?
(अ) कार्बन डाइऑक्साइड (ब) मिथाइल आइसोसाइनेट (MIC) (स) सल्फर डाइऑक्साइड (द) नाइट्रोजन ऑक्साइड
✔ उत्तर: (ब) मिथाइल आइसोसाइनेट (MIC)
प्र.4 उपभोक्ताओं को मिलावटी और घटिया सामग्री से बचाने हेतु कौन-सा विधिक ढाँचा बनाया गया है?
(अ) न्यूनतम मजदूरी कानून (ब) उपभोक्ता संरक्षण कानून (स) शिक्षा का अधिकार अधिनियम (द) वन संरक्षण कानून
✔ उत्तर: (ब) उपभोक्ता संरक्षण कानून
खंड 'ब' : अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (4 × 1 = 4 अंक)
प्र.5 न्यूनतम वेतन कानून क्यों अनिवार्य माना जाता है?
उत्तर: ताकि नियोक्ताओं द्वारा श्रमिकों का आर्थिक शोषण न किया जा सके और उन्हें जीवन-निर्वाह योग्य पारिश्रमिक प्राप्त हो।
प्र.6 भोपाल गैस त्रासदी किस बहुराष्ट्रीय कंपनी के संयंत्र में घटित हुई थी?
उत्तर: यूनियन कार्बाइड (Union Carbide)।
प्र.7 पर्यावरण और प्रदूषण नियंत्रण हेतु सरकार कानून क्यों निर्मित करती है?
उत्तर: नागरिकों के स्वच्छ जल, शुद्ध वायु और स्वस्थ वातावरण में जीने के मूल अधिकार की रक्षा हेतु।
प्र.8 कार्यस्थलों पर सुरक्षा मानकों का क्रियान्वयन सुनिश्चित कराना किसका प्राथमिक दायित्व है?
उत्तर: संयंत्र प्रबंधन (मालिकों) और राज्य के श्रम व सुरक्षा निरीक्षण विभाग का।
खंड 'स' : लघु उत्तरीय प्रश्न (3 × 3 = 9 अंक)
प्र.9 बाजार में श्रमिकों के शोषण की संभावना क्यों बनी रहती है? इसे रोकने के उपाय बताइए।
- व्यापक बेरोजगारी के कारण मजदूर कम दरों पर और बिना सुरक्षा के भी कार्य स्वीकार करने को विवश होते हैं।
- सरकार इसे रोकने हेतु न्यूनतम मजदूरी तय करती है तथा श्रम कानूनों के उल्लंघन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करती है।
प्र.10 भोपाल गैस त्रासदी से औद्योगिक समाज को क्या प्रमुख सबक मिलता है?
प्र.11 पर्यावरण संरक्षण के लिए बनाए गए कानूनों का क्या महत्व है?
खंड 'द' : दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (2 × 4 = 8 अंक)
प्र.12 'कानून और सामाजिक न्याय' के अंतर्संबंध को स्पष्ट कीजिए। श्रमिकों के लिए यह क्यों आवश्यक है?
अंतर्संबंध: कानून शक्ति के असंतुलन को समाप्त कर निर्बल वर्ग को सामर्थ्यवान वर्ग के शोषण से विधिक सुरक्षा दिलाता है।
श्रमिकों हेतु आवश्यकता:- पारिश्रमिक की सुरक्षा: अनुचित कटौती और कम मजदूरी से मुक्ति दिलाना।
- मानवीय कार्य-दशाएँ: काम के निश्चित घंटे, साप्ताहिक अवकाश और स्वच्छ कार्यस्थल का अधिकार।
- दुर्घटना संरक्षण: कार्यस्थल पर चोट लगने या मृत्यु होने पर क्षतिपूर्ति (Compensation) सुनिश्चित करना।
प्र.13 भोपाल गैस त्रासदी के कारणों और इसके उपरांत हुए विधिक सुधारों का विश्लेषण कीजिए।
- त्रासदी के कारण: यूनियन कार्बाइड संयंत्र में सुरक्षा मानकों की अनदेखी, चेतावनी सेंसरों की निष्क्रियता और लागत कम करने के लिए अकुशल कर्मियों की तैनाती।
- विधिक सुधार: इस हादसे के पश्चात भारत सरकार ने पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 लागू किया, कारखानों के प्रदूषण और सुरक्षा ऑडिट को कड़ा बनाया तथा न्यायालयों ने स्वच्छ पर्यावरण को अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार का अभिन्न अंग माना।

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