अध्याय 10: स्वतंत्रता के बाद
नव-स्वतंत्र भारत की चुनौतियाँ, रियासतों का एकीकरण, संविधान निर्माण, भाषाई राज्य एवं बोर्ड परीक्षा 2027 मॉडल पेपर
नोट: यह अध्ययन सामग्री राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE/RSCERT) के अद्यतन पाठ्यक्रम के अनुसार कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान की बोर्ड परीक्षा तथा प्रतियोगी परीक्षाओं (REET, RPSC शिक्षक भर्ती) की आधारभूत तैयारी हेतु तैयार की गई है।
1. प्रस्तावना: 15 अगस्त 1947 और एक नए राष्ट्र का उदय
लगभग दो शताब्दियों के औपनिवेशिक शासन के उपरांत 15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि को भारत स्वतंत्र हुआ। स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपने प्रसिद्ध भाषण 'ट्रिस्ट विद डेस्टिनी' (Tryst with Destiny - नियति से साक्षात्कार) में इसे एक नए युग के आरंभ की संज्ञा दी। यद्यपि स्वतंत्रता देश के लिए अपार उल्लास लाई, किंतु विभाजन के घाव, शरणार्थियों का पुनर्वास और 500 से अधिक देशी रियासतों का एकीकरण जैसी विकट चुनौतियाँ भी साथ लेकर आई।
2. स्वतंत्रता के समय नव-राष्ट्र के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ
| प्रमुख चुनौती | समस्या का स्वरूप एवं समाधान |
|---|---|
| विभाजन व शरणार्थी संकट | विभाजन के उपरांत बड़े पैमाने पर हुई सांप्रदायिक हिंसा के कारण पाकिस्तान से लगभग 80 लाख शरणार्थी भारत आए। इन विस्थापितों के भोजन, आवास, रोजगार और पुनर्वास की तात्कालिक व्यवस्था करना सबसे बड़ी प्राथमिकता थी। |
| देशी रियासतों का एकीकरण | ब्रिटिश शासन के अंत पर भारत में लगभग 565 स्वायत्त देशी रियासतें थीं। उन्हें भारत या पाकिस्तान में शामिल होने अथवा स्वतंत्र रहने का विकल्प दिया गया था। इन्हें एक संप्रभु राष्ट्र में एकीकृत करना अत्यंत दुरूह कार्य था। |
| आर्थिक विकास व लोकतंत्र | अधिकांश जनसंख्या निर्धनता, भुखमरी और अशिक्षा से ग्रस्त थी। एक ऐसी लोकतांत्रिक राजनीतिक प्रणाली की स्थापना करनी थी जो सामाजिक न्याय, समानता और सर्वांगीण आर्थिक समृद्धि सुनिश्चित कर सके। |
3. रियासतों का एकीकरण: सरदार पटेल की भूमिका
भारत के उप-प्रधानमंत्री एवं प्रथम गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने अद्वितीय प्रशासनिक कौशल, कूटनीति और दृढ़ इच्छाशक्ति से बिखरी हुई रियासतों का एकीकरण किया:
- विलय पत्र (Instrument of Accession): सरदार पटेल और वी.पी. मेनन ने शासकों को राष्ट्रीय हित में समझाया तथा 'प्रिवी पर्स' (राजकीय निजी थैली/पेंशन) का प्रावधान कर अधिकांश रियासतों के हस्ताक्षर प्राप्त कर लिए।
- कठिन रियासतों का समाधान: जूनागढ़, हैदराबाद और कश्मीर जैसी रियासतों ने विलय में हिचकिचाहट दिखाई। सरदार पटेल ने जनमत संग्रह और पुलिस कार्रवाई (ऑपरेशन पोलो द्वारा हैदराबाद का विलय) के माध्यम से देश की एकता को अक्षुण्ण रखा। इसी अप्रतिम योगदान हेतु उन्हें 'भारत का लौह पुरुष' (Iron Man of India) कहा जाता है।
4. संविधान निर्माण एवं मुख्य विशेषताएँ
- संविधान सभा: दिसंबर 1946 से नवंबर 1949 के मध्य लगभग तीन वर्षों तक संविधान सभा की विस्तृत बैठकें हुईं। इसके अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे।
- प्रारूप समिति (Drafting Committee): इसके अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर थे, जिनकी दूरदर्शिता के कारण उन्हें 'भारतीय संविधान का जनक' कहा जाता है।
- लागू होना: 26 नवंबर 1949 को अंगीकृत करने के बाद 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान पूर्णतः लागू हुआ, जिसे हम प्रतिवर्ष गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते हैं।
- प्रमुख विशेषताएँ:
- सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार: लिंग, धर्म, जाति या संपत्ति के भेदभाव के बिना प्रत्येक वयस्क नागरिक को मतदान का अधिकार दिया गया।
- विधि के समक्ष समानता: जातिगत छुआछूत (अस्पृश्यता) को कानूनी अपराध घोषित किया गया तथा वंचित वर्गों के उत्थान हेतु आरक्षण का प्रावधान किया गया।
- धर्मनिरपेक्षता: राज्य का कोई आधिकारिक धर्म नहीं होगा और सभी नागरिकों को अपनी आस्था का पालन करने की स्वतंत्रता होगी।
5. राज्यों का भाषाई पुनर्गठन
- प्रारंभिक संशय: राष्ट्रीय नेताओं को आशंका थी कि भाषा के आधार पर राज्यों के विभाजन से देश की एकता कमजोर हो सकती है।
- आंध्र प्रदेश का गठन (1953): मद्रास प्रांत से अलग तेलुगुभाषी राज्य की मांग को लेकर स्वतंत्रता सेनानी पोट्टी श्रीरामुलु ने 58 दिनों का अनशन किया और उनका देहांत हो गया। इसके बाद जन-विद्रोह के दबाव में 1 अक्टूबर 1953 को भाषा के आधार पर प्रथम राज्य आंध्र प्रदेश का गठन हुआ।
- राज्य पुनर्गठन आयोग (1953-1956): न्यायमूर्ति फजल अली की अध्यक्षता में गठित आयोग की अनुशंसा पर 1956 में राज्य पुनर्गठन अधिनियम पारित हुआ, जिसने भाषाई आधार पर 14 राज्यों और 6 केंद्र शासित प्रदेशों का खाका तैयार किया।
6. आर्थिक नियोजन और पंचवर्षीय योजनाएँ
- योजना आयोग (1950): देश के भौतिक व मानवीय संसाधनों के संतुलित दोहन हेतु मार्च 1950 में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में योजना आयोग का गठन हुआ।
- मिश्रित अर्थव्यवस्था (Mixed Economy): भारत ने न तो पूर्ण पूँजीवाद चुना और न ही पूर्ण साम्यवाद। इसमें भारी उद्योगों, सार्वजनिक सेवाओं का दायित्व राज्य (सरकार) पर रहा, जबकि उपभोक्ता वस्तुओं और व्यापार में निजी क्षेत्र को प्रोत्साहन दिया गया।
- पंचवर्षीय योजनाओं का लक्ष्य:
- प्रथम पंचवर्षीय योजना (1951-1956): कृषि, खाद्यान्न आत्मनिर्भरता और वृहद सिंचाई परियोजनाओं (भाखड़ा नांगल, दामोदर घाटी बांध) पर केंद्रित।
- द्वितीय पंचवर्षीय योजना (1956-1961): पी.सी. महालनोबिस मॉडल पर आधारित, जिसमें भारी बुनियादी उद्योगों (भिलाई, दुर्गापुर, राउरकेला इस्पात संयंत्र) के निर्माण पर बल दिया गया।
RBSE कक्षा 8 बोर्ड परीक्षा - 2027
विषय: सामाजिक विज्ञान (इतिहास) • मॉडल प्रश्न पत्र
अध्याय 10: स्वतंत्रता के बाद | पूर्णांक: 25 | समय: 45 मिनट
खंड 'अ' : बहुविकल्पीय प्रश्न (प्रत्येक प्रश्न 1 अंक)
-
भारत किस ऐतिहासिक तिथि को स्वतंत्र हुआ था?
(अ) 26 जनवरी 1950 (ब) 15 अगस्त 1947 (स) 2 अक्टूबर 1869 (द) 26 नवंबर 1949
उत्तर: (ब) 15 अगस्त 1947 -
भारतीय संविधान संपूर्ण देश में कब लागू किया गया था?
(अ) 15 अगस्त 1947 (ब) 26 नवंबर 1949 (स) 26 जनवरी 1950 (द) 1 जनवरी 1951
उत्तर: (स) 26 जनवरी 1950 -
भाषाई आधार पर गठित होने वाला स्वतंत्र भारत का प्रथम राज्य कौन सा था?
(अ) मद्रास (ब) बॉम्बे (स) आंध्र प्रदेश (द) पंजाब
उत्तर: (स) आंध्र प्रदेश -
संविधान सभा की प्रारूप समिति (Drafting Committee) के अध्यक्ष कौन थे?
(अ) डॉ. राजेंद्र प्रसाद (ब) पं. जवाहरलाल नेहरू (स) सरदार वल्लभभाई पटेल (द) डॉ. भीमराव अंबेडकर
उत्तर: (द) डॉ. भीमराव अंबेडकर
खंड 'ब' : अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (प्रत्येक प्रश्न 1 अंक)
प्र.5 स्वतंत्र भारत के प्रथम उप-प्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री कौन थे जिन्हें 'भारत का लौह पुरुष' कहा जाता है?
उत्तर: सरदार वल्लभभाई पटेल।
प्र.6 भारत में सुनियोजित आर्थिक विकास हेतु 'योजना आयोग' का गठन किस वर्ष किया गया था?
उत्तर: मार्च 1950 में।
प्र.7 देशी रियासतों के शासकों को विलय के बदले दिए जाने वाले वार्षिक भत्ते को क्या कहा जाता था?
उत्तर: प्रिवी पर्स (Privy Purse)।
प्र.8 भारतीय संविधान को तैयार करने में संविधान सभा को लगभग कितना समय लगा था?
उत्तर: लगभग 3 वर्ष (2 वर्ष, 11 माह और 18 दिन - दिसंबर 1946 से नवंबर 1949)।
खंड 'स' : लघु उत्तरीय प्रश्न (प्रत्येक प्रश्न 3 अंक)
प्र.9 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता प्राप्ति के समय भारत के सम्मुख कौन-सी तीन विकट चुनौतियाँ थीं?
उत्तर:
1. शरणार्थी संकट: विभाजन के कारण पाकिस्तान से आए 80 लाख शरणार्थियों के आवास, भोजन और पुनर्वास की समस्या।
2. रियासतों का एकीकरण: 500 से अधिक स्वायत्त देशी रियासतों को भारतीय संघ में सम्मिलित कर भौगोलिक व राजनीतिक अखंडता सुनिश्चित करना।
3. आर्थिक पुनरुद्धार: औपनिवेशिक शोषण से उत्पन्न घोर निर्धनता, खाद्यान्न संकट व बेरोजगारी को समाप्त कर लोकतांत्रिक संस्थाओं का निर्माण करना।
प्र.10 भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन की पृष्ठभूमि एवं उसके संवैधानिक परिणामों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
1. स्वतंत्रता के उपरांत तेलुगु, कन्नड़, मराठी आदि भाषाई समुदायों ने अपनी मातृभाषा के अनुसार पृथक प्रशासनिक सीमाओं की मांग की।
2. पोट्टी श्रीरामुलु के बलिदान के उपरांत 1953 में सर्वप्रथम आंध्र प्रदेश का गठन हुआ।
3. व्यापक मांग को देखते हुए सरकार ने 1953 में 'राज्य पुनर्गठन आयोग' बनाया, जिसकी अनुशंसा पर 1956 का राज्य पुनर्गठन अधिनियम पारित कर देश को भाषाई आधार पर पुनर्गठित किया गया।
प्र.11 स्वतंत्र भारत के संविधान की प्रमुख बुनियादी विशेषताओं का संक्षेप में उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
1. सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार: सभी नागरिकों को बिना किसी लिंग, वर्ग अथवा जातिगत भेदभाव के मत देने का अधिकार।
2. समानता का अधिकार: विधि के समक्ष प्रत्येक नागरिक समान है; अस्पृश्यता (छुआछूत) का पूर्ण उन्मूलन किया गया।
3. धर्मनिरपेक्ष राज्य: भारत का कोई आधिकारिक धर्म नहीं है; राज्य सभी धार्मिक आस्थाओं के प्रति समान सम्मान का भाव रखता है।
खंड 'द' : दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (प्रत्येक प्रश्न 4 अंक)
प्र.12 सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा 500 से अधिक देशी रियासतों के भारतीय संघ में एकीकरण की ऐतिहासिक प्रक्रिया का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर:
चुनौती का स्वरूप: अंग्रेजों की विदाई के समय देशी नरेशों को यह विकल्प दिया गया कि वे भारत या पाकिस्तान में मिलें अथवा स्वतंत्र रहें। यदि रियासतें स्वतंत्र रहतीं, तो भारत कई छोटे-छोटे विरोधी टुकड़ों में बँट जाता।
कूटनीतिक कार्यपद्धति:
• सरदार पटेल ने अत्यंत धैर्य, कूटनीति और व्यावहारिक सूझबूझ का परिचय दिया। उन्होंने राजाओं को समझाया कि उनका और उनकी प्रजा का भविष्य केवल अखंड भारत संघ में ही सुरक्षित है।
• उन्होंने 'इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन' (विलय पत्र) पर सहमति बनवाई और शासकों को निजी व्यय हेतु 'प्रिवी पर्स' का संवैधानिक संरक्षण प्रदान किया।
• जिन रियासतों ने भारत विरोधी रुख अपनाया—जैसे जूनागढ़ और हैदराबाद—वहाँ पटेल ने दृढ़ता दिखाते हुए जनमत संग्रह और आवश्यक पुलिस कार्रवाई (ऑपरेशन पोलो) का सहारा लेकर उन्हें भारत में मिलाया। इस अदम्य कार्य हेतु उन्हें राष्ट्र का 'लौह पुरुष' कहा जाता है।
प्र.13 स्वतंत्र भारत के आरंभिक दशकों में आर्थिक आत्मनिर्भरता हेतु अपनाए गए नियोजन मॉडल, पंचवर्षीय योजनाओं और मिश्रित अर्थव्यवस्था की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
नियोजन की आवश्यकता: स्वतंत्रता के समय भारत में कृषि पिछड़ी हुई थी और भारी उद्योगों का अभाव था। इस स्थिति से निपटने हेतु मार्च 1950 में 'योजना आयोग' की स्थापना की गई।
पंचवर्षीय योजनाओं का स्वरूप:
1. प्रथम योजना (1951-56): कृषि उत्पादन बढ़ाने, सिंचाई नेटवर्क सुधारने और भाखड़ा नांगल व हीराकुंड जैसी वृहद बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं पर केंद्रित रही।
2. द्वितीय योजना (1956-61): भारी उद्योगों के निर्माण पर केंद्रित थी। भिलाई, दुर्गापुर और राउरकेला में आधुनिक इस्पात कारखाने स्थापित किए गए।
मिश्रित अर्थव्यवस्था का मॉडल: भारत ने पूँजीवाद और समाजवाद के चरम रूपों से बचते हुए 'मिश्रित अर्थव्यवस्था' को अपनाया। इसके अंतर्गत रक्षा, ऊर्जा, रेलवे और भारी उद्योगों जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर सरकार (सार्वजनिक क्षेत्र) का नियंत्रण रहा, जबकि कृषि, लघु उद्योग और उपभोक्ता बाजार को निजी क्षेत्र के लिए खुला रखा गया। इस दोहरे मॉडल ने स्वतंत्र भारत के औद्योगिक आधार का निर्माण किया।

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