RBSE Class 8 Social Science Chapter 5 Notes & Model Paper: हाशिए की समझ (सम्पूर्ण हल सहित)

NCERT / RBSE कक्षा 8 | सामाजिक और राजनीतिक जीवन - III

अध्याय 5: हाशिए की समझ (हाशिएकरण)

सम्पूर्ण अध्याय नोट्स एवं बोर्ड परीक्षा मॉडल प्रश्न-पत्र (हल सहित)

1. 'हाशिएकरण' (Marginalisation) का अर्थ क्या है?

आपने अपनी कॉपी के पन्नों पर देखा होगा कि बाईं या दाईं तरफ एक खाली जगह छोड़ी जाती है, जिसे 'हाशिया' (Margin) कहा जाता है। उस जगह पर मुख्य बातें या नोट्स लिखे जाते हैं, लेकिन वह मुख्य पन्ने का हिस्सा नहीं माना जाता। इसी प्रकार, समाज में भी जब किसी व्यक्ति, समूह या समुदाय को मुख्यधारा से काट दिया जाता है, उन्हें सामाजिक, आर्थिक या राजनीतिक रूप से पीछे धकेल दिया जाता है, और उन्हें समाज के केंद्र में महत्व नहीं दिया जाता, तो इस स्थिति को 'हाशिएकरण' (Marginalisation) कहा जाता है।

हाशिए के लोग कौन होते हैं? जो लोग भाषा, रीति-रिवाजों, गरीबी, धर्म या अपनी विशिष्ट संस्कृति के कारण बहुसंख्यक समाज से अलग-थलग महसूस करते हैं, वे हाशिए पर होते हैं (जैसे— आदिवासी समुदाय, अल्पसंख्यक वर्ग या घुमंतू जातियाँ)।

2. समाज में लोग हाशिए पर क्यों चले जाते हैं?

लोग अपनी इच्छा से हाशिए पर नहीं जाते, बल्कि कुछ सामाजिक, आर्थिक और ऐतिहासिक परिस्थितियों के कारण उन्हें पीछे धकेल दिया जाता है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  • अलग भाषा और संस्कृति: जब किसी समूह की भाषा, खान-पान या पहनावा बहुसंख्यक लोगों से भिन्न होता है, तो उन्हें अक्सर उपेक्षा और पूर्वाग्रह की नजरों से देखा जाता है।
  • गरीबी और आर्थिक पिछड़ापन: आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मानजनक रोजगार से वंचित रह जाते हैं।
  • सामाजिक भेदभाव और रूढ़िवादिता: जातिगत भेदभाव, छुआछूत और रूढ़िबद्ध धारणाओं (Stereotypes) के कारण कुछ खास समुदायों को समाज में दोयम दर्जे का समझा जाता है।
  • राजनीतिक शक्तिहीनता: प्रशासनिक और राजनीतिक मंचों पर प्रतिनिधित्व न होने से ये वर्ग अपने अधिकारों के लिए सशक्त आवाज नहीं उठा पाते।

3. आदिवासी (Adivasis) और हाशिएकरण

भारत में आदिवासी समुदायों को हाशिएकरण का सबसे प्रमुख उदाहरण माना जाता है:

• आदिवासी कौन हैं?

'आदिवासी' शब्द का शाब्दिक अर्थ है— मूल निवासी। ये वे समुदाय हैं जो पीढ़ियों से जंगलों और प्रकृति के सानिध्य में रहते आए हैं।

• जंगलों से अभिन्न जुड़ाव

आदिवासी अपनी आजीविका, संस्कृति, धार्मिक आस्था और जीवन शैली के लिए प्रत्यक्ष रूप से वनों और प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर होते हैं।

• विस्थापन और संकट

खनन (Mining), बड़े बाँधों और औद्योगीकरण के कारण वनों की अंधाधुंध कटाई से आदिवासियों को उनकी पैतृक भूमि से विस्थापित होना पड़ा है, जिससे वे अपनी आजीविका खोकर शहरों में मजदूरी करने को विवश हैं।

4. अल्पसंख्यक (Minorities) और हाशिएकरण

बहुसंख्यक आबादी के मुकाबले जिन धार्मिक या भाषाई समूहों की जनसंख्या कम होती है, उन्हें अल्पसंख्यक कहा जाता है।

  • भारत की विविधता को अक्षुण्ण रखने के लिए अल्पसंख्यकों के सांस्कृतिक और धार्मिक अधिकारों की रक्षा करना अनिवार्य है।
  • भारतीय संविधान यह सुनिश्चित करता है कि बहुसंख्यक वर्ग का सांस्कृतिक या सामाजिक वर्चस्व अल्पसंख्यकों पर न थोपा जाए, जिससे सभी को समान सम्मान मिल सके।

RBSE कक्षा 8 बोर्ड परीक्षा अभ्यास प्रश्न-पत्र

विषय: सामाजिक और राजनीतिक जीवन - III | अध्याय 5: हाशिए की समझ

पूर्णांक: 25 अंक | समय: 45 मिनट

खंड 'अ' : बहुविकल्पीय प्रश्न (4 × 1 = 4 अंक)

प्र.1 'हाशिएकरण' (Marginalisation) शब्द का सामान्य अर्थ समाज में क्या दर्शाता है?
(अ) समाज के केंद्र में मुख्य भूमिका निभाना   (ब) समाज के मुख्यधारा से कटकर पीछे या किनारे पर रह जाना   (स) देश का सर्वोच्च पद प्राप्त करना   (द) अत्यधिक धनवान बनना

✔ उत्तर: (ब) समाज के मुख्यधारा से कटकर पीछे या किनारे पर रह जाना

प्र.2 'आदिवासी' शब्द का शाब्दिक अर्थ क्या होता है?
(अ) शहरों में रहने वाले लोग   (ब) देश के मूल निवासी जो जंगलों के पास रहते हैं   (स) विदेशी व्यापारी   (द) बड़े कारखानों के मालिक

✔ उत्तर: (ब) देश के मूल निवासी जो जंगलों के पास रहते हैं

प्र.3 समाज में किन्हीं समुदायों के हाशिए पर जाने का मुख्य कारण क्या हो सकता है?
(अ) गरीबी और आर्थिक पिछड़ापन   (ब) अलग भाषा और संस्कृति   (स) सामाजिक भेदभाव और पूर्वाग्रह   (द) उपर्युक्त सभी

✔ उत्तर: (द) उपर्युक्त सभी

प्र.4 अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करना किसी भी लोकतांत्रिक देश के लिए क्यों आवश्यक है?
(अ) तानाशाही कायम करने के लिए   (ब) बहुसंख्यक वर्ग के दबाव और सांस्कृतिक वर्चस्व से बचाने के लिए   (स) देश की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने के लिए   (द) केवल एक ही भाषा को बढ़ावा देने के लिए

✔ उत्तर: (ब) बहुसंख्यक वर्ग के दबाव और सांस्कृतिक वर्चस्व से बचाने के लिए

खंड 'ब' : अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (4 × 1 = 4 अंक)

प्र.5 हाशिए के लोग किसे कहा जाता है?

उत्तर: वे लोग जो सामाजिक, आर्थिक या सांस्कृतिक कारणों से समाज की मुख्यधारा से कटकर अलग-थलग पड़ जाते हैं।

प्र.6 आदिवासी समुदाय अपनी आजीविका के लिए मुख्य रूप से किस पर निर्भर रहते हैं?

उत्तर: जंगलों और प्राकृतिक संसाधनों पर।

प्र.7 'अल्पसंख्यक' शब्द से क्या तात्पर्य है?

उत्तर: किसी क्षेत्र या देश की कुल जनसंख्या के अनुपात में संख्या बल में कम रहने वाले भाषाई या धार्मिक समुदाय।

प्र.8 जंगलों की कटाई और खनन कार्यों का सबसे प्रतिकूल प्रभाव किस समुदाय पर पड़ा है?

उत्तर: आदिवासी समुदायों पर।

खंड 'स' : लघु उत्तरीय प्रश्न (3 × 3 = 9 अंक)

प्र.9 समाज में लोग हाशिए पर कैसे चले जाते हैं? मुख्य कारणों को संक्षेप में लिखिए।

उत्तर:
  • आर्थिक विषमता: गरीबी के कारण बुनियादी सुविधाओं (शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छ जल) का अभाव।
  • सांस्कृतिक अलगाव: अलग भाषा, वेशभूषा और रीति-रिवाज होने के कारण मुख्य समाज द्वारा दूरी बनाना।
  • सामाजिक पूर्वाग्रह: जातिगत असमानता और रूढ़िवादिता के कारण उपेक्षा।

प्र.10 आदिवासी समुदायों का जीवन वनों से किस प्रकार जुड़ा हुआ है?

उत्तर: आदिवासी अपने भोजन, ईंधन, औषधियों, लकड़ी और आवास के लिए वनों पर निर्भर हैं। उनकी लोक-संस्कृति, धार्मिक विश्वास और सामाजिक संरचना का मूल आधार प्रकृति और वन ही हैं।

प्र.11 अल्पसंख्यकों को संवैधानिक सुरक्षा और विशेष अधिकारों की आवश्यकता क्यों होती है?

उत्तर: लोकतंत्र में बहुसंख्यक वर्ग की संस्कृति या प्रभुत्व के दबाव से छोटे समूहों की पहचान मिटने का भय रहता है। अल्पसंख्यकों के धर्म, भाषा और लिपि के संरक्षण के लिए संविधान उन्हें विशेष सुरक्षा प्रदान करता है।

खंड 'द' : दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (2 × 4 = 8 अंक)

प्र.12 हाशिएकरण से क्या तात्पर्य है? हाशिए पर स्थित समूहों की प्रमुख समस्याओं का वर्णन कीजिए।

उत्तर:

परिभाषा: समाज के किसी वर्ग या समूह का विकास की मुख्यधारा से बाहर होकर उपेक्षित हो जाना हाशिएकरण कहलाता है।

प्रमुख समस्याएँ:
  1. विकास के साधनों का अभाव: गुणवत्तापूर्ण विद्यालयों, अस्पतालों और सुरक्षित पेयजल की अनुपलब्धता।
  2. आर्थिक शोषण: स्थायी आजीविका न होने से न्यूनतम मजदूरी पर असंगठित क्षेत्रों में कार्य करना।
  3. सामाजिक हीनभावना: मुख्यधारा के समाज द्वारा पूर्वाग्रहपूर्ण दृष्टिकोण से देखना।
  4. जबरन विस्थापन: औद्योगिक परियोजनाओं के चलते अपनी पैतृक भूमि से बेदखल होकर बस्तियों (Slums) में रहने की मजबूरी।

प्र.13 भारत में आदिवासियों के हाशिए पर जाने के कारणों का विश्लेषण कीजिए।

उत्तर:
  • वन संसाधनों का दोहन: आदिवासी बहुल क्षेत्रों में खनिज, लकड़ी और जल विद्युत परियोजनाओं के लिए जंगलों का बड़े पैमाने पर अधिग्रहण किया गया।
  • पारंपरिक अधिकारों की समाप्ति: वनों के संरक्षण व औद्योगिक कानूनों के चलते आदिवासियों का वनोपज पर पारंपरिक अधिकार सीमित हो गया।
  • सांस्कृतिक क्षति: विस्थापन के कारण उनकी सदियों पुरानी लोक-परंपराएँ और सामाजिक ताना-बाना बिखर गया।
  • गलत सामाजिक धारणाएँ: समाज और मीडिया द्वारा उन्हें अक्सर आधुनिकता से अनभिज्ञ या आदिम मानकर पूर्वाग्रह पालना।
RBSE कक्षा 8 परीक्षा तैयारी | सामाजिक और राजनीतिक जीवन - III

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