कक्षा 6 सामाजिक विज्ञान अध्याय 13: कार्य का महत्व | Work and Its Importance Notes, MCQs | RBSE, RPSC, REET
अध्याय 13: कार्य का महत्व
कक्षा 6 सामाजिक विज्ञान — Complete Notes
आर्थिक गतिविधियाँ • गैर-आर्थिक गतिविधियाँ • मूल्य संवर्धन
सामुदायिक सहभागिता • सेवा कार्य • Exam Watch • MCQs
1. परिचय एवं कार्य का दृष्टिकोण
स्वामी विवेकानंद का संदेश
"जब आप कोई काम कर रहे हों, उससे बाहर कुछ न सोचें। उसे पूजा की तरह करें, सबसे बड़ी पूजा की तरह और उस समय अपना पूरा जीवन उसे समर्पित कर दें।"
यह विचार हमें अपने कार्य के प्रति पूर्ण एकाग्रता, समर्पण और जिम्मेदारी की भावना रखने की प्रेरणा देता है।
हमारे आस-पास के लोग विभिन्न प्रकार की आजीविका और सेवा कार्यों में संलग्न होते हैं। ये कार्य समाज के सुचारू संचालन के लिए आवश्यक हैं।
समाज में प्रत्येक प्रकार के कार्य का अपना महत्व है। कुछ कार्य आय अर्जित करने के लिए किए जाते हैं, जबकि कुछ कार्य सेवा, स्नेह, कर्तव्य और आत्मिक संतोष के लिए किए जाते हैं।
2. गतिविधियों के प्रकार — आर्थिक और गैर-आर्थिक
मानव द्वारा की जाने वाली गतिविधियों को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में समझा जा सकता है:
- आर्थिक गतिविधियाँ (Economic Activities)
- गैर-आर्थिक गतिविधियाँ (Non-Economic Activities)
क) आर्थिक गतिविधियाँ (Economic Activities)
वे गतिविधियाँ जिनमें धन, मुद्रा (पैसा) या वस्तु का नकद मूल्य सम्मिलित होता है और जिन्हें मुख्य रूप से अर्थोपार्जन यानी आजीविका कमाने के लिए किया जाता है, आर्थिक गतिविधियाँ कहलाती हैं।
उदाहरण
- बाजार में सामान बेचना।
- कारखाने में श्रमिक का काम करना।
- वकील द्वारा शुल्क लेना।
- बस या ट्रक चलाना और उसके बदले भुगतान प्राप्त करना।
भुगतान के प्रमुख प्रकार
- वेतन: नियमित मासिक या निर्धारित अवधि का भुगतान।
- मजदूरी: दैनिक या निश्चित समयावधि के कार्य के बदले भुगतान।
- शुल्क: किसी सेवा के बदले किया जाने वाला भुगतान।
- वस्तु के रूप में भुगतान: मुद्रा के बजाय वस्तु या अन्य गैर-मौद्रिक रूप में भुगतान।
ख) गैर-आर्थिक गतिविधियाँ (Non-Economic Activities)
वे गतिविधियाँ जिनसे आय या संपत्ति अर्जित करना मुख्य उद्देश्य नहीं होता, बल्कि जिन्हें कृतज्ञता, स्नेह, सेवा, आदर, कर्तव्य और आत्मिक संतोष के लिए किया जाता है, गैर-आर्थिक गतिविधियाँ कहलाती हैं।
उदाहरण
- माता-पिता द्वारा परिवार के लिए भोजन बनाना।
- बच्चों को गृहकार्य में मदद करना।
- दादा-दादी की सेवा करना।
- पड़ोस के बच्चों को निःशुल्क पढ़ाना।
आर्थिक गतिविधियों में आय या आर्थिक मूल्य प्रमुख होता है, जबकि गैर-आर्थिक गतिविधियों में सेवा, स्नेह, कर्तव्य, सहयोग या आत्मिक संतोष प्रमुख हो सकता है।
3. मूल्य संवर्धन (Value Addition)
आर्थिक गतिविधियों में किसी वस्तु के रूप में परिवर्तन की प्रक्रिया के प्रत्येक चरण पर उसके मूल्य में वृद्धि हो सकती है। इस वृद्धि को 'मूल्य संवर्धन' कहा जाता है।
उदाहरण — बढ़ई और कुर्सी
एक बढ़ई ₹600 में लकड़ी खरीदता है। वह अपने कौशल, समय और श्रम से उस लकड़ी की कुर्सी बनाता है और उसे ₹1000 में बेचता है।
यहाँ खरीद मूल्य और बिक्री मूल्य के बीच ₹400 का अंतर है।
इस उदाहरण में वस्तु को उपयोगी रूप देने में बढ़ई के कौशल, समय और प्रयास से उसके आर्थिक मूल्य में वृद्धि हुई। इसे मूल्य संवर्धन के रूप में समझा जा सकता है।
कच्ची सामग्री → श्रम/कौशल → उपयोगी वस्तु → अधिक मूल्य
4. सामुदायिक सहभागिता और सेवा कार्य
समाज में अनेक कार्य ऐसे होते हैं जिन्हें लोग बिना किसी आर्थिक लाभ की अपेक्षा के स्वेच्छा से करते हैं। ऐसे कार्य सामुदायिक सहयोग और सेवा की भावना को मजबूत करते हैं।
स्वैच्छिक और निःशुल्क सेवा
समाज में कई कार्य बिना किसी आर्थिक लाभ की उम्मीद के किए जाते हैं।
- गुरुद्वारों में लंगर में सेवा देना।
- मंदिरों में प्रसाद वितरण में सहयोग करना।
- जरूरतमंद लोगों की सहायता करना।
स्वच्छ भारत अभियान
अपने घर, गलियों, पार्कों और सार्वजनिक स्थानों को साफ-सुथरा रखने के लिए नागरिकों का सामूहिक प्रयास स्वच्छता की भावना को बढ़ावा देता है।
वन महोत्सव
वृक्षारोपण और वन संरक्षण के प्रति जागरूकता लाने के लिए समुदाय के सदस्यों को एक साथ लाने वाला प्रमुख अभियान वन महोत्सव है।
सामुदायिक सेवा समाज में सहयोग, जिम्मेदारी और पर्यावरण संरक्षण की भावना को मजबूत करती है।
🎯 प्रतियोगी परीक्षाओं (RPSC/REET) की दृष्टि से मुख्य परीक्षा बिंदु — Exam Watch
-
कार्य को पूजा के समान मानने का संदेश किसने दिया था?
उत्तर: स्वामी विवेकानंद -
वे गतिविधियाँ जिनसे आय या धन अर्जित होता है,
क्या कहलाती हैं?
उत्तर: आर्थिक गतिविधियाँ -
लकड़ी से कुर्सी बनाने जैसी प्रक्रिया में लागत से
अधिक मूल्य का जुड़ना क्या कहलाता है?
उत्तर: मूल्य संवर्धन -
वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण के लिए आयोजित होने
वाला प्रमुख राष्ट्रीय उत्सव कौन-सा है?
उत्तर: वन महोत्सव
प्रश्न 1: निम्नलिखित में से कौन-सी एक आर्थिक गतिविधि का उदाहरण है?
(अ) एक माँ द्वारा अपने बच्चों के लिए घर पर खाना बनाना
(ब) एक बढ़ई द्वारा लकड़ी की कुर्सी बनाकर बाजार में बेचना
(स) एक छात्र द्वारा अपनी छोटी बहन को निःशुल्क पढ़ाना
(द) एक युवा द्वारा अपने बुजुर्ग दादाजी को दवा लाकर देना
जिस गतिविधि में मुद्रा, वेतन, शुल्क या वस्तु का आर्थिक मूल्य सम्मिलित होता है और जिसका उद्देश्य आय अर्जित करना होता है, वह आर्थिक गतिविधि कहलाती है। इसके विपरीत परिवार और सेवा से जुड़े दिए गए उदाहरण गैर-आर्थिक गतिविधियों के उदाहरण हैं।
प्रश्न 2: कच्ची सामग्री से उपयोगी वस्तु बनाने की प्रक्रिया में उसके मूल्य में होने वाली वृद्धि को क्या कहा जाता है?
(अ) मूल्य संवर्धन
(ब) वस्तु विनिमय
(स) आर्थिक अवमूल्यन
(द) गैर-मौद्रिक हानि
किसी वस्तु को कच्ची सामग्री से उपयोगी वस्तु में बदलने की प्रक्रिया में कौशल, श्रम और अन्य प्रयासों के कारण उसके आर्थिक मूल्य में जो वृद्धि होती है, उसे मूल्य संवर्धन (Value Addition) कहा जाता है।
📚 Quick Revision — एक नजर में
- कार्य का दृष्टिकोण: कार्य को एकाग्रता और समर्पण के साथ करना।
- आर्थिक गतिविधि: आय या आर्थिक मूल्य से जुड़ी गतिविधि।
- गैर-आर्थिक गतिविधि: सेवा, स्नेह, कर्तव्य या आत्मिक संतोष से जुड़ी गतिविधि।
- वेतन: नियमित भुगतान।
- मजदूरी: दैनिक या निश्चित अवधि के कार्य का भुगतान।
- शुल्क: सेवा के बदले भुगतान।
- मूल्य संवर्धन: वस्तु या सेवा के आर्थिक मूल्य में वृद्धि।
- लंगर: सामुदायिक रसोई और सेवा का उदाहरण।
- स्वच्छ भारत अभियान: स्वच्छता और नागरिक सहभागिता से संबंधित अभियान।
- वन महोत्सव: वृक्षारोपण और वन संरक्षण से संबंधित अभियान।

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