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सामाजिक विज्ञान: कक्षा 7
हमारा इतिहास – हमारे अतीत II
अध्याय 1: हज़ार वर्षों के दौरान हुए परिवर्तनों की पड़ताल
विस्तृत Notes | महत्वपूर्ण तथ्य | मॉडल प्रश्न-पत्र 2027
1. अध्याय का परिचय एवं मुख्य अवधारणाएँ
- काल-परिवर्तन का अध्ययन: यह अध्याय इतिहास में समय के साथ होने वाले बदलावों को समझने पर केंद्रित है। इसमें मुख्य रूप से लगभग 700 ईसवी से लेकर 1750 ईसवी तक (लगभग एक हज़ार वर्षों) के काल में हुए महत्वपूर्ण सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक परिवर्तनों की पड़ताल की गई है।
- इतिहासकारों के स्रोत: इस काल के अध्ययन के लिए इतिहासकारों ने सिक्कों, शिलालेखों, वास्तुकला तथा लिखित सामग्रियों (पांडुलिपियों) पर मुख्य रूप से निर्भर रहना शुरू किया।
2. मानचित्रों और शब्दावली में बदलाव
- मानचित्रकला का विकास: इस कालखंड में मानचित्र बनाने के तरीकों में बड़ा अंतर आया। 12वीं शताब्दी में अल-इदरीसी और 18वीं शताब्दी के फ्रांसीसी मानचित्रकार द्वारा बनाए गए नक्शों में भौगोलिक विवरण और क्षेत्रों के नामों में स्पष्ट भिन्नता देखने को मिलती है।
- 'हिंदुस्तान' शब्द के अर्थ में बदलाव: समय के साथ ऐतिहासिक दस्तावेजों में प्रयुक्त शब्दों के अर्थ भी बदल जाते हैं। उदाहरण के लिए, 'हिंदुस्तान' शब्द का अर्थ आज आधुनिक भारत से है, किंतु 13वीं शताब्दी में मिनहाज-ए-सिराज ने इसका प्रयोग केवल दिल्ली के सुल्तान के अधिकार क्षेत्र में आने वाले भूमि-भाग (पंजाब, हरियाणा और गंगा-यमुना के बीच का क्षेत्र) के लिए किया था।
- 'विदेशी' शब्द का अर्थ: मध्यकाल में 'विदेशी' (अजनबी) वह व्यक्ति होता था जो किसी दिए गए समाज या गाँव का हिस्सा न हो, यानी जो अनजान हो।
3. नए सामाजिक और राजनीतिक समूह
- नयी प्रौद्योगिकियाँ: इस एक हज़ार वर्ष के दौरान समाज में कई नई तकनीकें आईं, जैसे सिंचाई में रहट, कताई में चरखा और युद्ध में आग्नेयास्त्र (बारूद वाले हथियार)।
- राजपूतों का उदय: इस काल में 'राजपूत' (राजपुत्र अर्थात राजा का पुत्र) समूह का महत्व बढ़ा, जिसमें योद्धाओं के साथ-साथ सेनापति और शासक वर्ग शामिल था।
- जाति और समाज: किसानों और जातियों का उदय हुआ। जातियों ने अपनी सूचियाँ (जात-पंचायतें) बनाईं जिनके अपने नियम और उपनियम थे, जिनका पालन सदस्यों को करना पड़ता था।
📝 RBSE & RPSC पैटर्न आधारित संपूर्ण मॉडल प्रश्न-पत्र – 2027
कक्षा 7 – सामाजिक विज्ञान (इतिहास: हमारे अतीत – II)
अध्याय 1: हज़ार वर्षों के दौरान हुए परिवर्तनों की पड़ताल
प्रश्न-पत्र संरचना:
बहुविकल्पीय प्रश्न – 4 अंक, अतिलघु उत्तरीय प्रश्न – 4 अंक,
लघु उत्तरीय प्रश्न – 9 अंक तथा दीर्घ उत्तरीय प्रश्न – 8 अंक।
खंड 'अ': बहुविकल्पीय एवं विश्लेषणात्मक प्रश्न (MCQs)
प्रत्येक प्रश्न 1 अंक — कुल 4 अंक
प्रत्येक प्रश्न 1 अंक — कुल 4 अंक
प्र.1 12वीं शताब्दी के प्रसिद्ध अरब भूगोलवेत्ता अल-इदरीसी द्वारा बनाए गए मानचित्र के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- इस मानचित्र में भारतीय उपमहाद्वीप का विस्तृत और उल्टा नक्शा (दक्षिण में श्रीलंका और उत्तर में उत्तरी भारत) दर्शाया गया है।
- इसमें स्थानों के नाम अरबी भाषा में चिह्नित हैं।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
उत्तर: (स) 1 और 2 दोनों
व्याख्या:
अल-इदरीसी के 12वीं सदी के नक्शे में आज के नक्शे के विपरीत
श्रीलंका ऊपर की तरफ और दक्षिण भारत का क्षेत्र विशिष्ट रूप से
दर्शाया गया था, तथा उसमें स्थान अरबी में लिखे थे।
प्र.2 मध्यकाल (लगभग 700 से 1750 ईस्वी) के दौरान समाज में लाई गई नई तकनीकों में निम्नलिखित में से क्या शामिल था?
उत्तर: (द) उपर्युक्त सभी
व्याख्या:
इस एक हज़ार वर्ष के कालखंड में सिंचाई, वस्त्र निर्माण और युद्ध-कला
में क्रांतिकारी तकनीकी बदलाव आए थे।
प्र.3 इतिहासकार मिनहाज-ए-सिराज द्वारा 13वीं शताब्दी में प्रयुक्त 'हिंदुस्तान' शब्द के अंतर्गत निम्नलिखित में से कौन-सा क्षेत्र शामिल नहीं था?
उत्तर: (स) दक्षिण भारत
व्याख्या:
मिनहाज-ए-सिराज ने 'हिंदुस्तान' का राजनीतिक अर्थ केवल दिल्ली के
सुल्तान के नियंत्रण वाले भू-भाग के लिए लिया था, जिसमें दक्षिण भारत शामिल नहीं था।
प्र.4 मध्यकाल में 'विदेशी' शब्द का आशय किस रूप में लिया जाता था?
उत्तर: (ब) कोई भी अजनबी व्यक्ति जो किसी समाज या गाँव का हिस्सा न हो
व्याख्या:
आधुनिक युग में विदेशी का अर्थ 'दूसरे देश का व्यक्ति' होता है,
परंतु मध्यकाल में किसी अनजान व्यक्ति को जो गाँव या समाज के लिए नया हो,
विदेशी कहा जाता था।
खंड 'ब': अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
प्रत्येक प्रश्न 1 अंक — कुल 4 अंक
प्रत्येक प्रश्न 1 अंक — कुल 4 अंक
प्र.5 पांडुलिपियों (Manuscripts) की नकल करने में इतिहासकारों के सामने सबसे बड़ी मुख्य समस्या क्या आती थी?
उत्तर:
नकल करते समय लेखकों से छोटे-मोटे बदलाव (शब्दों या वाक्यों का अंतर)
हो जाते थे, जिससे सदियों बाद मूल पाठ में काफी भिन्नता आ जाती थी।
व्याख्या:
चूँकि प्रिंटिंग प्रेस नहीं थे, हाथ से नकल करने पर मूल लेखक के विचारों
में अनजाने में बदलाव हो जाता था।
प्र.6 मध्यकाल में किसानों के विभिन्न समूहों को संगठित रखने और उनके आचरण को नियंत्रित करने वाली संस्था क्या कहलाती थी?
उत्तर: जाति-पंचायत।
व्याख्या:
जातियाँ अपने सदस्यों के लिए नियम बनाती थीं और बुजुर्गों की सभा
(पंचायत) द्वारा उनका पालन करवाती थीं।
प्र.7 बारहवीं से सोलहवीं शताब्दी के बीच राजनीतिक पटल पर उभरने वाला नया और प्रमुख योद्धा समूह कौन-सा था?
उत्तर:
राजपूत (जो 'राजपुत्र' अर्थात राजा के पुत्र कहलाते थे)।
व्याख्या:
इस वर्ग में सेनापति, राजा और सैनिक शामिल थे जिन्होंने अपनी वीरता से
राजनीतिक महत्व प्राप्त किया।
प्र.8 इस कालखंड (700 से 1750 ईस्वी) के दौरान उपमहाद्वीप में कौन-से नए खाद्य पदार्थ बाहर से आए?
उत्तर: आलू, मक्का, मिर्च, चाय और कॉफी।
व्याख्या:
ये खाद्य पदार्थ और फसलें मध्यकाल के दौरान व्यापारियों और प्रवासियों
के माध्यम से भारत पहुँचीं।
खंड 'स': लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रत्येक प्रश्न 3 अंक — कुल 9 अंक
प्रत्येक प्रश्न 3 अंक — कुल 9 अंक
प्र.9 मध्यकालीन इतिहास के अध्ययन के लिए 'इतिहासकारों के स्रोत' प्राचीन काल की तुलना में किस प्रकार भिन्न थे?
उत्तर:
- इस काल में सिक्कों, शिलालेखों और वास्तुकला के साथ-साथ लिखित सामग्रियों (पांडुलिपियों) की संख्या और विविधता बहुत बढ़ गई थी।
- कागज का उपयोग सस्ता होने और व्यापक रूप से उपलब्ध होने के कारण ऐतिहासिक साक्ष्य अधिक मात्रा में मिलने लगे।
व्याख्या:
स्रोतों की अधिकता के कारण इस काल का इतिहास अधिक विस्तार से उपलब्ध होता है,
हालांकि पांडुलिपियों की विश्वसनीयता की जाँच करना कठिन होता है।
प्र.10 इतिहासकार अतीत को कालखंडों में विभाजित क्यों करते हैं? इसके मुख्य आधार को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
- इतिहास को कालखंडों में बाँटने का मुख्य उद्देश्य समय के साथ होने वाले बड़े परिवर्तनों और युग की मुख्य विशेषताओं को सरलता से समझना है।
- इसका आधार मुख्य रूप से आर्थिक, सामाजिक बदलाव, तकनीकी विकास और राजनीतिक सत्ता में आए परिवर्तन होते हैं।
व्याख्या:
काल-विभाजन से इतिहास को क्रमिक और वैज्ञानिक रूप से पढ़ना आसान हो जाता है।
प्र.11 मध्यकाल में समाज में हुए परिवर्तनों के परिणामस्वरूप 'जात-पंचायतों' की क्या भूमिका रही?
उत्तर:
- जातियाँ अपने सदस्यों के आचरण को नियंत्रित करने के लिए स्वयं अपने नियम और उपनियम बनाती थीं।
- इन नियमों का पालन करवाने के लिए बुजुर्गों की एक सभा होती थी जिसे जात-पंचायत कहा जाता था, जो सामाजिक अनुशासन बनाए रखती थी।
व्याख्या:
ये पंचायतें स्थानीय स्तर पर न्याय और सामाजिक व्यवस्था को सुचारू रूप से
संचालित करने का कार्य करती थीं।
खंड 'द': दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रत्येक प्रश्न 4 अंक — कुल 8 अंक
प्रत्येक प्रश्न 4 अंक — कुल 8 अंक
प्र.12 एक हज़ार वर्षों (700 से 1750 ईस्वी) के दौरान भारतीय उपमहाद्वीप में हुए तकनीकी और सामाजिक-सांस्कृतिक बदलावों का विस्तार से विश्लेषण कीजिए।
उत्तर:
- तकनीकी विकास: सिंचाई के लिए 'रहट', वस्त्र निर्माण के लिए 'चरखा' और युद्ध में आग्नेयास्त्रों (बारूद) का उपयोग शुरू हुआ।
- कृषि एवं खान-पान: किसानों के नए समूह उभरे और उपमहाद्वीप में आलू, मक्का, मिर्च जैसी फसलें आईं।
- राजनीतिक एवं सामाजिक गतिशीलता: राजपूतों जैसे नए योद्धा समूहों का उदय हुआ और समाज जातियों तथा उपजातियों में बँट गया, जिनकी अपनी नियंत्रण प्रणालियाँ थीं।
- निष्कर्ष: यह काल ठहराव का नहीं, बल्कि तीव्र गतिशीलता और सांस्कृतिक मेल-जोल का था जिसने आधुनिक समाज की नींव रखी।
व्याख्या:
यह प्रश्न छात्र की समग्र समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता की परख करता है।
प्र.13 इतिहास के स्रोतों के रूप में 'पांडुलिपियों' के अध्ययन में इतिहासकारों को किन प्रमुख चुनौतियों का सामना करना पड़ता है?
उत्तर:
- हस्तलिखित प्रतियों की सीमा: मुद्रणालय न होने के कारण पांडुलिपियों की नकल हाथ से करनी पड़ती थी, जिससे लेखन त्रुटियाँ हो जाती थीं।
- पाठ्यगत परिवर्तन: नकल करते समय लिपिक अपने अनुसार शब्दों या वाक्यों में बदलाव कर देते थे, जिससे सदियों बाद मूल लेखक के मूल शब्द और अर्थ बदल जाते थे।
- मूल प्रतियों की दुर्लभता: अधिकांश मूल पांडुलिपियाँ आज उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए इतिहासकारों को बाद की प्रतियों पर निर्भर रहना पड़ता है।
व्याख्या:
यह प्रश्न स्रोतों की प्रामाणिकता और इतिहास-लेखन की वैज्ञानिक प्रक्रिया
को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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