RBSE Class 7 History Chapter 2 | नए राजा और उनके राज्य | Notes & Model Paper 2027

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सामाजिक विज्ञान: कक्षा 7

हमारा इतिहास – हमारे अतीत II

अध्याय 2: नए राजा और उनके राज्य

विस्तृत Notes | महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर | मॉडल प्रश्न-पत्र 2027

1. अध्याय का परिचय एवं मुख्य अवधारणाएँ

  • नए राजवंशों का उदय: सातवीं शताब्दी के आते-आते भारतीय उपमहाद्वीप के विभिन्न भागों में नए राजवंशों का उदय हुआ। सातवीं से बारहवीं सदी के बीच का यह काल राजनीतिक उथल-पुथल और क्षेत्रीय राज्यों के उभार का काल माना जाता है।
  • सामंतवाद और महासामंत: राजाओं द्वारा अपने अधीन बड़े भू-स्वामियों या योद्धा सरदारों को 'सामंत' या 'महामंडलेश्वर' घोषित किया जाता था। ये सामंत राजा के लिए उपहार लाते थे, उनके दरबार में हाजिरी लगाते थे और सैन्य सहायता प्रदान करते थे।

2. राज्यों में प्रशासन और संसाधन

  • राजस्व प्राप्ति: राजा अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने और सेना के रखरखाव के लिए किसानों, पशुपालकों और व्यापारियों से कर (Tax) वसूलते थे। इन करों में सबसे महत्वपूर्ण रूप से विभिन्न प्रकार के उपकर और जबरन श्रम (विष्टि) शामिल थे।
  • प्रशस्ति और भूमि अनुदान: राजा अपनी उपलब्धियों का वर्णन करने के लिए 'प्रशस्तियाँ' (ब्राह्मणों द्वारा रचित प्रशंसात्मक ग्रंथ) लिखवाते थे। इसके बदले में राजा ब्राह्मणों को भूमि अनुदान देते थे, जिन्हें ताम्रपत्रों पर दर्ज किया जाता था।

3. युद्ध और धन प्राप्ति: त्रिपक्षीय संघर्ष

  • कन्नौज के लिए संघर्ष: गंगा घाटी में स्थित 'कन्नौज' नगर सामरिक और आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण था। इस पर नियंत्रण पाने के लिए तीन बड़े राजवंशों— गुर्जर-प्रतिहार, राष्ट्रकूट और पाल वंश के बीच सदियों तक संघर्ष चला, जिसे इतिहास में 'त्रिपक्षीय संघर्ष' (Tripartite Struggle) कहा जाता है।
  • महमूद गज़नी और आक्रमण: गजनी का सुल्तान महमूद गज़नी (997 से 1030 ईस्वी) ने भारतीय उपमहाद्वीप पर कई बार आक्रमण किया। उसका मुख्य उद्देश्य भारत की अपार धन-संपदा को लूटना था, जिसमें 1025 ईस्वी का सोमनाथ मंदिर (गुजरात) पर किया गया आक्रमण सबसे प्रसिद्ध है। उसने अल-बिरूनी नामक विद्वान से अपने इतिहास 'किताब उल-हिंद' को लिखवाया।
  • चाहमान (चौहान) शासक: अजमेर और दिल्ली के आसपास शासन करने वाले चाहमान वंश के सबसे प्रसिद्ध शासक पृथ्वीराज तृतीय (पृथ्वीराज चौहान) थे, जिन्होंने 1191 ईस्वी के तराइन के प्रथम युद्ध में मुहम्मद गौरी को हराया था, परंतु 1192 ईस्वी के तराइन के द्वितीय युद्ध में वे पराजित हो गए।

📝 RBSE & RPSC पैटर्न आधारित संपूर्ण मॉडल प्रश्न-पत्र – 2027

कक्षा 7 – सामाजिक विज्ञान (इतिहास: हमारे अतीत – II)

अध्याय 2: नए राजा और उनके राज्य

पूर्णांक: 25 अंक समय: 45 मिनट
प्रश्न-पत्र संरचना: बहुविकल्पीय प्रश्न – 4 अंक, अतिलघु उत्तरीय प्रश्न – 4 अंक, लघु उत्तरीय प्रश्न – 9 अंक तथा दीर्घ उत्तरीय प्रश्न – 8 अंक।
खंड 'अ': बहुविकल्पीय एवं विश्लेषणात्मक प्रश्न (MCQs)
प्रत्येक प्रश्न 1 अंक — कुल 4 अंक

प्र.1 कन्नौज पर नियंत्रण प्राप्त करने के लिए हुए 'त्रिपक्षीय संघर्ष' में निम्नलिखित में से कौन-सा राजवंश शामिल नहीं था?

(अ) गुर्जर-प्रतिहार
(ब) राष्ट्रकूट
(स) चोल
(द) पाल

उत्तर: (स) चोल
व्याख्या: कन्नौज के लिए हुए त्रिपक्षीय संघर्ष में मुख्य रूप से गुर्जर-प्रतिहार, राष्ट्रकूट और पाल वंश के शासक शामिल थे, जबकि चोल वंश दक्षिण भारत तक सीमित था।

प्र.2 गजनी के सुल्तान महमूद गज़नी द्वारा 1025 ईस्वी में किस प्रसिद्ध मंदिर पर आक्रमण कर उसे लूटा गया था?

(अ) काशी विश्वनाथ मंदिर
(ब) सोमनाथ मंदिर (गुजरात)
(स) महाकालेश्वर मंदिर
(द) दिलवाड़ा जैन मंदिर

उत्तर: (ब) सोमनाथ मंदिर (गुजरात)
व्याख्या: महमूद गज़नी ने भारत की धन-संपदा को लूटने के उद्देश्य से गुजरात के प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण किया था।

प्र.3 चाहमान (चौहान) वंश के सबसे प्रसिद्ध शासक कौन थे, जिन्होंने 1191 ईस्वी में तराइन के प्रथम युद्ध में मुहम्मद गौरी को हराया था?

(अ) अणोराज
(ब) विग्रहराज चतुर्थ
(स) पृथ्वीराज तृतीय
(द) पृथ्वीराज द्वितीय

उत्तर: (स) पृथ्वीराज तृतीय
व्याख्या: पृथ्वीराज तृतीय (पृथ्वीराज चौहान) चाहमान वंश के प्रतापी शासक थे, जिन्होंने तराइन के प्रथम युद्ध में गौरी को मात दी थी।

प्र.4 मध्यकालीन शासन व्यवस्था में राजाओं द्वारा 'सामंतों' को क्या कहा जाता था या उनकी मुख्य भूमिका क्या होती थी?

(अ) केवल कर वसूलना
(ब) राजा को सैन्य सहायता और उपहार देना
(स) मंदिरों का निर्माण करना
(द) केवल विदेशी व्यापार संभालना

उत्तर: (ब) राजा को सैन्य सहायता और उपहार देना
व्याख्या: सामंत वे भू-स्वामी या योद्धा सरदार होते थे जो राजा के दरबार में हाजिरी लगाते थे और युद्ध के समय राजा को सैनिक बल प्रदान करते थे।
खंड 'ब': अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
प्रत्येक प्रश्न 1 अंक — कुल 4 अंक

प्र.5 राजाओं की उपलब्धियों का वर्णन करने वाले उन विशेष लेखों को क्या कहा जाता है जो अक्सर विद्वान ब्राह्मणों द्वारा रचे जाते थे?

उत्तर: प्रशस्तियाँ।
व्याख्या: प्रशस्तियों में शासकों के गुणों और विजयों का अतिशयोक्तिपूर्ण या तथ्यात्मक वर्णन होता था।

प्र.6 गज़नी के आक्रमणकारियों के साथ भारत आने वाले किस प्रसिद्ध विद्वान ने अरबी में 'किताब उल-हिंद' नामक ग्रंथ की रचना की?

उत्तर: अल-बिरूनी।
व्याख्या: अल-बिरूनी ने भारतीय उपमहाद्वीप के भूगोल, समाज और संस्कृति का अध्ययन कर यह ऐतिहासिक ग्रंथ लिखा।

प्र.7 तराइन का द्वितीय युद्ध किस वर्ष लड़ा गया था जिसमें पृथ्वीराज तृतीय की पराजय हुई थी?

उत्तर: 1192 ईस्वी में।
व्याख्या: तराइन के द्वितीय युद्ध (1192 ई.) में मुहम्मद गौरी ने पृथ्वीराज चौहान को पराजित किया, जो भारतीय इतिहास का एक निर्णायक मोड़ था।

प्र.8 चोल साम्राज्य में मंदिर किस गतिविधि के मुख्य केंद्र माने जाते थे?

उत्तर: धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक गतिविधियों के केंद्र।
व्याख्या: चोल मंदिर केवल पूजा-स्थल नहीं बल्कि शिल्प, विशेषकर कांस्य मूर्तिकला और आर्थिक गतिविधियों के बड़े केंद्र थे।
खंड 'स': लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रत्येक प्रश्न 3 अंक — कुल 9 अंक

प्र.9 मध्यकाल में राजाओं द्वारा वित्तीय संसाधन जुटाने के लिए किसानों और व्यापारियों पर किस प्रकार के कर लगाए जाते थे?

उत्तर:
  • कृषि उपज का एक निश्चित भाग (लगान) कर के रूप में लिया जाता था।
  • कारीगरों और व्यापारियों से व्यवसाय पर कर वसूला जाता था।
  • इसके अलावा जबरन श्रम (बिना वेतन के काम, जिसे 'विष्टि' कहा जाता था) और नकद कर भी लिए जाते थे।
व्याख्या: ये कर राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था और सेना के रखरखाव का मुख्य आधार होते थे।

प्र.10 'त्रिपक्षीय संघर्ष' (Tripartite Struggle) क्या था और यह किस क्षेत्र के नियंत्रण के लिए लड़ा गया था?

उत्तर:
  • यह संघर्ष गंगा घाटी में स्थित महत्वपूर्ण नगर कन्नौज पर आधिपत्य जमाने के लिए लड़ा गया था।
  • इसमें भारत की तीन बड़ी ताक़तें—गुर्जर-प्रतिहार, राष्ट्रकूट और पाल वंश आपस में उलझे हुए थे।
व्याख्या: चूँकि कन्नौज सामरिक और आर्थिक दृष्टि से बहुत समृद्ध था, इसलिए उस पर नियंत्रण पाने के लिए इन राजवंशों में सदियों तक संघर्ष चला।

प्र.11 चोल साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में कांस्य मूर्तिकला की क्या विशेषता थी?

उत्तर:
  • चोल कांस्य मूर्तियाँ दुनिया भर में उत्कृष्ट कला का नमूना मानी जाती हैं।
  • ये मूर्तियाँ मुख्य रूप से देवी-देवताओं की थीं, जिनमें 'नटराज' (शिव की तांडव मुद्रा वाली मूर्ति) सबसे प्रसिद्ध है।
व्याख्या: चोल शिल्पकार धातु ढलाई की लुप्त-मोम (Lost Wax) तकनीक में अत्यधिक कुशल थे।
खंड 'द': दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रत्येक प्रश्न 4 अंक — कुल 8 अंक

प्र.12 महमूद गज़नी के भारत पर आक्रमणों के उद्देश्य और उनके प्रभावों का विस्तार से विश्लेषण कीजिए।

उत्तर:
  • आक्रमण का उद्देश्य: महमूद गज़नी का उद्देश्य भारत में साम्राज्य स्थापित करना नहीं, बल्कि यहाँ के मंदिरों और नगरों की अपार धन-संपदा को लूटकर अपने साम्राज्य (गजनी) को मजबूत बनाना था।
  • प्रमुख आक्रमण: उसने सोमनाथ मंदिर सहित कई समृद्ध नगरों को लूटा।
  • प्रभाव: इन आक्रमणों से भारतीय राजाओं की सैन्य कमजोरी उजागर हुई और उत्तर भारत के मंदिर तथा आर्थिक ढाँचा बुरी तरह प्रभावित हुआ। साथ ही, अल-बिरूनी जैसे विद्वान के आने से सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी हुआ।
व्याख्या: गज़नी के आक्रमण मध्यकालीन भारतीय राजनीतिक इतिहास की एक बड़ी घटना थी, जिसने यहाँ की राजनीतिक स्थिरता को झकझोर दिया था।

प्र.13 चोल साम्राज्य के अंतर्गत स्थानीय प्रशासन, मंदिर निर्माण और वास्तुकला की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

उत्तर:
  • मंदिर वास्तुकला: चोल राजाओं (जैसे राजराज प्रथम और राजेंद्र प्रथम) ने तंजावुर और गंगाईकोंडचोलपुरम के विशाल भव्य पत्थरों के मंदिर बनवाए, जो द्रविड़ वास्तुकला के उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
  • प्रशासनिक दक्षता: चोल साम्राज्य में स्थानीय स्वशासन (गाँव की सभाएँ और समितियाँ) बहुत मजबूत थी।
  • आर्थिक एवं सामाजिक जीवन: मंदिर केवल पूजा के स्थान नहीं थे, बल्कि वे रोजगार, शिल्प और आर्थिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र थे।
व्याख्या: चोल वंश दक्षिण भारत के सबसे संगठित और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध साम्राज्यों में से एक था।

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