RBSE Class 7 Social Science Chapter 3: दिल्ली के सुल्तान (Delhi Sultanate) - Complete Notes & Model Paper

RBSE & RPSC पैटर्न आधारित संपूर्ण नोट्स

सामाजिक विज्ञान: कक्षा 7 (हमारा इतिहास - हमारे अतीत II)

अध्याय 3: दिल्ली के सुल्तान

1. अध्याय का परिचय एवं मुख्य अवधारणाएँ

दिल्ली का महत्व: बारहवीं शताब्दी के मध्य में दिल्ली सबसे पहले तोमर राजपूतों के अधीन एक महत्वपूर्ण वाणिज्यिक केंद्र बनी, और बाद में बारहवीं सदी के अंत तक चौहानों (चाहमानों) के नियंत्रण में आई। तेरहवीं शताब्दी में दिल्ली के सुल्तानों के आने से इस क्षेत्र की कायापलट हुई और यहाँ से एक विशाल साम्राज्य की राजधानी का उदय हुआ।

दिल्ली के सुल्तान (प्रमुख वंश): दिल्ली सल्तनत के अंतर्गत मुख्य रूप से पाँच प्रमुख राजवंशों ने शासन किया:

  • राजपूत वंश: तोमर और अनंगपाल (आरंभिक शासक) व पृथ्वीराज चौहान।
  • प्रारंभिक तुर्क शासक (गुलाम वंश - 1206–1290): कुतुबुद्दीन ऐबक, इल्तुतमिश और रजिया सुल्तान।
  • खिलजी वंश (1290–1320): जलालुद्दीन खिलजी और अलाउद्दीन खिलजी।
  • तुगलक वंश (1320–1414): ग्यासुद्दीन तुगलक, मुहम्मद बिन तुगलक और फ़िरोज़ शाह तुगलक।
  • सैयद वंश (1414–1451) तथा लोदी वंश (1451–1526): बहलोल लोदी और इब्राहिम लोदी।

2. प्रशासन और नियंत्रण (इक्ता प्रणाली और आंतरिक सुरक्षा)

इक्ता प्रणाली: विशाल साम्राज्य पर नियंत्रण रखने के लिए दिल्ली के सुल्तानों ने प्रांतों को 'इक्ता' में बाँट दिया और इन्हें संभालने के लिए सैन्य कमांडरों को नियुक्त किया, जिन्हें 'इक्तादार' या 'मुक्ती' कहा जाता था। मुक्ती का मुख्य कार्य कर वसूलना और अपनी सेना का रखरखाव करना था।

अलाउद्दीन खिलजी और मुहम्मद बिन तुगलक के प्रशासनिक सुधार:

  • अलाउद्दीन खिलजी ने सेना को नगद वेतन देना शुरू किया और वस्तुओं की कीमतें नियंत्रित करने के लिए कड़े बाजार नियंत्रण (मूल्य नियंत्रण) लागू किए।
  • मुहम्मद बिन तुगलक ने अपने प्रशासन के दौरान राजधानी परिवर्तन (दिल्ली से दौलताबाद) और सांकेतिक मुद्रा (टोकन करेंसी) जैसे कई प्रयोग किए, जो प्रशासनिक और आर्थिक रूप से चर्चित रहे।

3. सल्तनत काल की वास्तुकला और मंगोल आक्रमण

मंगोल आक्रमण: चंगेज खान के नेतृत्व में मंगोलों ने उत्तर-पश्चिम भारत पर लगातार आक्रमण किए, जिससे निपटने के लिए दिल्ली के सुल्तानों को एक बहुत बड़ी स्थायी सेना रखनी पड़ी।

मस्जिद और वास्तुकला: सुल्तानों द्वारा कुतुब मीनार, अलाई दरवाजा, और विभिन्न भव्य मस्जिदों का निर्माण करवाया गया। 'मस्जिद' (वह स्थान जहाँ मुसलमान सजदा करते हैं) सल्तनत काल की वास्तुकला का एक प्रमुख प्रतीक थी।


RBSE & RPSC पैटर्न आधारित संपूर्ण मॉडल प्रश्न-पत्र - 2027

कक्षा 7 - सामाजिक विज्ञान (इतिहास: हमारे अतीत - II) | अध्याय 3: दिल्ली के सुल्तान

पूर्णांक: 25 अंक | समय: 45 मिनट

खंड 'अ' : बहुविकल्पीय एवं विश्लेषणात्मक प्रश्न (1 अंक × 4 = 4 अंक)

प्र.1 दिल्ली सल्तनत की पहली महिला शासिका (सुल्तान) कौन थीं, जिन्होंने 1236 ईस्वी में सिंहासन संभाला था?
(अ) चाँदबीबी     (ब) रजिया सुल्तान     (स) नूरजहाँ     (द) रजिया बेगम

उत्तर: (ब) रजिया सुल्तान
व्याख्या: इल्तुतमिश की बेटी रजिया सुल्तान दिल्ली की पहली महिला शासिका थीं, जिन्हें मिनहाज-ए-सिराज ने भी अपने इतिहास में योग्य माना था।

प्र.2 सैनिकों को नकद वेतन देने और अपने साम्राज्य में 'बाजार नियंत्रण' (मूल्य नियंत्रण) की कठोर नीति लागू करने वाला प्रसिद्ध सुल्तान कौन था?
(अ) गयासुद्दीन तुगलक     (ब) अलाउद्दीन खिलजी     (स) मुहम्मद बिन तुगलक     (द) सिकंदर लोदी

उत्तर: (ब) अलाउद्दीन खिलजी
व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी ने मंगोल आक्रमणों से निपटने के लिए विशाल सेना रखी और उनके खर्च के लिए वस्तुओं के दाम निश्चित कर दिए थे।

प्र.3 प्रांतीय प्रशासनिक व्यवस्था के तहत भू-राजस्व वसूलने और सैन्य टुकड़ियाँ रखने वाले अधिकारियों (इक्तादारों) को अन्य किस नाम से पुकारा जाता था?
(अ) मुक्ती     (ब) अमीर     (स) कोतवाल     (द) बरीद

उत्तर: (अ) मुक्ती
व्याख्या: इक्ता प्रणाली के अंतर्गत भू-क्षेत्रों के गवर्नरों या सैन्य कमांडरों को 'मुक्ती' या 'इक्तादार' कहा जाता था।

प्र.4 मंगोल शासक चंगेज खान के नेतृत्व में मंगोलों ने सबसे पहले दिल्ली सल्तनत पर किसके शासनकाल में आक्रमण किया था?
(अ) कुतुबुद्दीन ऐबक     (ब) इल्तुतमिश     (स) अलाउद्दीन खिलजी     (द) फिरोज शाह तुगलक

उत्तर: (ब) इल्तुतमिश
व्याख्या: इल्तुतमिश के शासनकाल के दौरान ही उत्तर-पश्चिम सीमा पर चंगेज खान के नेतृत्व में मंगोलों का खतरा मंडराने लगा था।

खंड 'ब' : अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (1 अंक × 4 = 4 अंक)

प्र.5 बारहवीं सदी के मध्य में सबसे पहले दिल्ली को अपनी राजधानी किस राजपूत वंश ने बनाया था?
उत्तर: तोमर राजपूत वंश ने।
व्याख्या: तोमर राजाओं के काल में दिल्ली एक महत्वपूर्ण वाणिज्यिक केंद्र के रूप में उभरी थी।


प्र.6 मुहम्मद बिन तुगलक द्वारा अपनी राजधानी दिल्ली से बदलकर किस दक्षिण के शहर में स्थानांतरित की गई थी?
उत्तर: दौलताबाद (देवगिरि)।
व्याख्या: साम्राज्य के केंद्र में होने के कारण उसने यह प्रयोग किया था जो बाद में असफल साबित हुआ।


प्र.7 अरबी भाषा का शब्द 'मस्जिद' का शाब्दिक अर्थ क्या होता है?
उत्तर: ऐसा स्थान जहाँ मुसलमान अल्लाह के सामने सजदा (घुटने और माथा टेककर प्रार्थना) करते हैं।
व्याख्या: जामा मस्जिद वह मुख्य मस्जिद होती है जहाँ कई मुसलमान साथ मिलकर नमाज पढ़ते हैं।


प्र.8 दिल्ली सल्तनत का अंतिम राजवंश कौन-सा था जिसके पतन के बाद मुगल साम्राज्य की नींव पड़ी?
उत्तर: लोदी वंश (इब्राहिम लोदी का शासन)।
व्याख्या: 1526 में पानीपत के प्रथम युद्ध में बाबर ने इब्राहिम लोदी को हराया था।

खंड 'स' : लघु उत्तरीय प्रश्न (3 अंक × 3 = 9 अंक)

प्र.9 'इक्ता प्रणाली' से आप क्या समझते हैं? स्पष्ट कीजिए कि मुक्ती या इक्तादारों के क्या मुख्य कर्तव्य होते थे?
उत्तर:
• सल्तनत काल में साम्राज्य को प्रशासनिक इकाइयों में बाँटा गया था जिन्हें 'इक्ता' कहा जाता था।
• इन क्षेत्रों के भू-भाग संभालने वाले अधिकारियों को 'मुक्ती' या इक्तादार कहा जाता था।
• उनका मुख्य कर्तव्य अपने इक्ता से कर (राजस्व) वसूलना और सुल्तान की आवश्यकता पड़ने पर सैन्य सहायता प्रदान करना था।
व्याख्या: यह प्रणाली सल्तनत के विस्तार और आंतरिक नियंत्रण की रीढ़ मानी जाती थी।


प्र.10 अलाउद्दीन खिलजी द्वारा उठाए गए प्रशासनिक और आर्थिक सुधारों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर:
• उसने सैनिकों को जागीर के बदले नकद वेतन देना शुरू किया।
• वस्तुओं के दाम तय कर दिए (बाजार नियंत्रण नीति) ताकि कम वेतन में भी सैनिक गुजारा कर सकें।
• कर संग्रह व्यवस्था को कड़ा किया ताकि बिचौलियों का प्रभाव कम हो सके।
व्याख्या: इन सुधारों के कारण वह अपनी विशाल सेना को कम संसाधनों में भी लंबे समय तक बनाए रख सका।


प्र.11 दिल्ली के सुल्तानों के सामने मंगोल आक्रमण एक बड़ी चुनौती क्यों बन गए थे?
उत्तर:
• चंगेज खान के नेतृत्व में मंगोल लगातार उत्तर-पश्चिम से भारतीय सीमाओं पर हमले कर रहे थे।
• इससे निपटने के लिए सुल्तानों को एक बहुत बड़ी स्थायी सेना रखनी पड़ी, जिससे राजकोष पर भारी आर्थिक दबाव पड़ा।
व्याख्या: मंगोल खतरे के कारण ही अलाउद्दीन खिलजी और मुहम्मद बिन तुगलक जैसे शासकों को अपनी रक्षात्मक नीतियाँ बहुत कड़ी करनी पड़ी थीं।

खंड 'द' : दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (4 अंक × 2 = 8 अंक)

प्र.12 दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक विस्तार और आंतरिक नियंत्रण में 'मुक्ती' (इक्तादारों) की भूमिका का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
उत्तर:
• नियंत्रण की व्यवस्था: सुल्तानों ने साम्राज्य को सुचारू रूप से चलाने के लिए दूर-दराज के इलाकों में मुक्ती नियुक्त किए।
• चुनौतियाँ: मुक्ती का पद वंशानुगत नहीं होता था और उनका स्थानांतरण अक्सर किया जाता था ताकि वे शक्तिशाली न बन सकें।
• नियंत्रण के उपाय: उनके कार्यालय का लेखा-परीक्षण (Auditing) करने के लिए केंद्र से लेखाकार भेजे जाते थे ताकि वे तयशुदा कर से अधिक न वसूल सकें।
• निष्कर्ष: सुल्तानों के कमजोर होने पर यही मुक्ती स्वतंत्र होने का प्रयास करने लगते थे, जो सल्तनत के बिखराव का कारण बना।
व्याख्या: यह प्रणाली केंद्र और प्रांत के बीच संतुलन बनाने का एक प्रयास थी, जिस पर सल्तनत की स्थिरता निर्भर करती थी।


प्र.13 रजिया सुल्तान के शासनकाल और उसकी सफलताओं-असफलताओं का मूल्यांकन करते हुए उस समय की राजनीतिक परिस्थितियों को समझाइए।
उत्तर:
• सिंहासन प्राप्ति: इल्तुतमिश की योग्य पुत्री रजिया ने 1236 में गद्दी संभाली, क्योंकि वह अपने भाइयों से अधिक सक्षम थीं।
• चुनौतियाँ: उस समय के तुर्क अमीर (सामंत) किसी स्त्री के अधीन कार्य करने में असहज महसूस करते थे, जिससे उनके खिलाफ लगातार षड्यंत्र रचे गए।
• योग्यता: मिनहाज-ए-सिराज ने भी स्वीकार किया कि वह अपने सभी भाइयों से अधिक गुणवान और कुशल थीं, परंतु लिंगभेद और राजनीतिक विरोध के कारण उन्हें दरबार में टिकने नहीं दिया गया।
• पतन: अंततः 1240 में षड्यंत्र के तहत उनकी सत्ता को समाप्त कर दिया गया।
व्याख्या: रजिया का शासनकाल मध्यकालीन भारतीय इतिहास में रूढ़िवादिता और राजनीतिक संघर्ष का एक अनूठा उदाहरण है।

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