RBSE Class 7 History Chapter 4 | मुग़ल साम्राज्य | Notes & Model Paper 2027

RBSE & RPSC पैटर्न आधारित संपूर्ण नोट्स

सामाजिक विज्ञान: कक्षा 7 (हमारा इतिहास - हमारे अतीत II)

अध्याय 4: मुग़ल साम्राज्य (सोलहवीं से सत्रहवीं शताब्दी)

1. अध्याय का परिचय एवं मुख्य अवधारणाएँ

मुग़ल कौन थे?: मुग़ल दो महान शासक वंशों के वंशज थे। माता की ओर से वे मंगोल शासक चंगेज खान (जो चीन और मध्य एशिया के कुछ भागों पर राज करता था) के उत्तराधिकारी थे और पिता की ओर से वे ईरान, इराक एवं वर्तमान तुर्की पर शासन करने वाले तैमूर (जिसकी मृत्यु 1404 में हुई) के वंशज थे। हालांकि, मुग़ल अपने को 'मुग़ल' या 'मंगोल' कहलवाना पसंद नहीं करते थे, क्योंकि चंगेज खान से जुड़ी स्मृतियों के साथ असंख्य लोगों का नरसंहार जुड़ा था। वे अपने को 'तैमूरी' कहलाना गर्व महसूस करते थे।

प्रमुख मुग़ल शासक: भारत में मुग़ल साम्राज्य की नींव बाबर ने 1526 में पानीपत के प्रथम युद्ध में इब्राहिम लोदी को हराकर रखी थी। इसके बाद हुमायूँ, अकबर, जहाँगीर, शाहजहाँ और औरंगजेब ने इस साम्राज्य का विस्तार किया।

2. मुग़ल सैन्य अभियान और प्रशासनिक नीतियाँ

  • प्रमुख सैन्य अभियान:
  • बाबर (1526–1530): 1526 में पानीपत में इब्राहिम लोदी को, 1527 में खानवा में राणा सांगा को पराजित किया।
  • अकबर (1556–1605): अकबर का शासनकाल मुग़ल साम्राज्य के विस्तार और मजबूती के लिए जाना जाता है। उसने उत्तर भारत (हल्दीघाटी का युद्ध, 1576) से लेकर दक्कन (दक्षिण भारत) तक अपना प्रभाव फैलाया।
  • औरंगजेब (1658–1707): इसके काल में मुग़ल साम्राज्य अपने सबसे बड़े भू-भाग पर फैला, परंतु दक्षिण के लंबे सैन्य संघर्षों ने साम्राज्य की नींव कमजोर कर दी।

मनसबदार और जागीरदार व्यवस्था: मुग़लों ने साम्राज्य में प्रशासनिक पदों को संभालने के लिए 'मनसबदार' व्यवस्था शुरू की। 'मनसब' का अर्थ एक पद या श्रेणी होता था। मनसबदारों को उनके वेतन का भुगतान 'जागीर' (राजस्व देने वाली भूमि) के रूप में मिलता था, जिन्हें जागीरदार कहा जाता था।

जब्त और भू-राजस्व: अकबर के राजस्व मंत्री टोडरमल ने प्रत्येक प्रांत को राजस्व मंडलों में बाँटा और फसल की दरों तथा नकद मूल्य की एक सूची तैयार की, जिसे 'जब्त' प्रणाली कहा गया।

3. अकबर की धार्मिक नीतियाँ और शासन के सिद्धांत

सुलह-ए-कुल: अकबर ने धार्मिक सहिष्णुता की नीति अपनाई जिसे 'सुलह-ए-कुल' (सर्वोच्च शांति या सभी के साथ शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व) कहा गया। इस नीति का उद्देश्य विभिन्न धर्मों (इस्लाम, हिंदू, ईसाई, जैन, पारसी आदि) के बीच भेद न करके न्याय और शांति स्थापित करना था।

अकबरनामा और आइन-ए-अकबरी: अकबर के नवरत्नों में से एक अुलफज़ल ने 'अकबरनामा' नामक ग्रंथ की रचना की, जिसका तीसरा भाग 'आइन-ए-अकबरी' है। इसमें अकबर के प्रशासन, घराने, सेना और राजस्व का विस्तृत विवरण मिलता है।

RBSE & RPSC पैटर्न आधारित संपूर्ण मॉडल प्रश्न-पत्र - 2027

कक्षा 7 - सामाजिक विज्ञान (इतिहास: हमारे अतीत - II)

अध्याय 4: मुग़ल साम्राज्य (सोलहवीं से सत्रहवीं शताब्दी)

पूर्णांक: 25 अंक | समय: 45 मिनट

खंड 'अ' : बहुविकल्पीय एवं विश्लेषणात्मक प्रश्न (Multiple Choice Questions)

(प्रत्येक प्रश्न 1 अंक - कुल 4 अंक)

प्र.1 मुग़ल शासक अपने आपको किस महान आक्रमणकारी का वंशज कहलाना गर्व महसूस करते थे, जबकि वे मंगोल चंगेज खान के भी वंशज थे? (अ) नादिर शाह (ब) तैमूर (स) अहमद शाह अब्दाली (द) कुतुबुद्दीन ऐबक

उत्तर: (ब) तैमूर
व्याख्या: मुग़ल माता की तरफ से चंगेज खान और पिता की तरफ से तैमूर के वंशज थे, परंतु वे चंगेज खान की क्रूरता के कारण खुद को 'तैमूरी' कहलवाना पसंद करते थे।

प्र.2 वर्ष 1526 में पानीपत के प्रथम युद्ध में इब्राहिम लोदी को हराकर भारत में मुग़ल साम्राज्य की नींव किसने रखी थी? (अ) हुमायूँ (ब) बाबर (स) अकबर (द) शेरशाह सूरी

उत्तर: (ब) बाबर
व्याख्या: जहीरुद्दीन मुहम्मद बाबर ने 1526 में पानीपत के पहले युद्ध में लोदी वंश के अंत के साथ मुग़ल वंश की स्थापना की थी।

प्र.3 मुग़ल प्रशासन में अपने पद, वेतन और सैन्य उत्तरदायित्व (जात एवं सवार) तय करवाने वाली व्यवस्था को क्या कहा जाता था? (अ) मनसबदारी व्यवस्था (ब) इक्ता प्रणाली (स) जागीरदारी प्रथा (द) मनसब और जात प्रथा

उत्तर: (अ) मनसबदारी व्यवस्था
व्याख्या: अकबर द्वारा चलाई गई मनसबदारी व्यवस्था के तहत अधिकारियों की श्रेणी और उनके घोड़ों/सैनिकों की संख्या तय होती थी।

प्र.4 अकबर के नवरत्नों में शामिल किस विद्वान ने 'अकबरनामा' और उसके प्रसिद्ध भाग 'आइन-ए-अकबरी' की रचना की थी? (अ) बीरबल (ब) राजा टोडरमल (स) अबुल फजल (द) तानसेन

उत्तर: (स) अबुल फजल
व्याख्या: अबुल फजल ने अकबर के शासनकाल का आधिकारिक इतिहास 'अकबरनामा' के रूप में लिखा था।

खंड 'ब' : अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Questions)

(प्रत्येक प्रश्न 1 अंक - कुल 4 अंक)

प्र.5 अकबर के राजस्व मंत्री राजा टोडरमल द्वारा भू-राजस्व की किस प्रसिद्ध प्रणाली को लागू किया गया था?

उत्तर: 'जब्त' प्रणाली।
व्याख्या: इसमें विभिन्न फसलों के लिए नकद दरों और पैदावार की अलग-अलग सूची तैयार की जाती थी।

प्र.6 अकबर द्वारा शुरू की गई धार्मिक सहिष्णुता और सर्वधर्म समभाव की नीति को क्या नाम दिया गया था?

उत्तर: 'सुलह-ए-कुल' (यानी सार्वभौमिक शांति)।
व्याख्या: यह नीति धर्म, जाति या वर्ग के भेद के बिना प्रजा में सद्भाव बनाए रखने के लिए थी।

प्र.7 हल्दीघाटी का प्रसिद्ध युद्ध किस वर्ष और किसके बीच लड़ा गया था?

उत्तर: 1576 ईस्वी में, मुग़ल सेना (अकबर) और महाराणा प्रताप के बीच।
व्याख्या: यह राजस्थान के इतिहास का एक अत्यंत गौरवशाली और संघर्षपूर्ण युद्ध माना जाता है।

प्र.8 औरंगजेब के शासनकाल के दौरान मुग़ल साम्राज्य के पतन का एक मुख्य कारण क्या उभरकर सामने आया?

उत्तर: दक्कन (दक्षिण भारत) में लंबे समय तक चले सैन्य संघर्ष और प्रशासनिक स्थिरता की कमी।
व्याख्या: दक्षिण के अभियानों ने मुग़ल राजकोष और सैन्य क्षमता को भारी क्षति पहुँचाई।

खंड 'स' : लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)

(प्रत्येक प्रश्न 3 अंक - कुल 9 अंक)

प्र.9 मुग़ल अपनी वंशावली को लेकर मंगोलों की बजाय तैमूर के वंशज कहलाना क्यों अधिक पसंद करते थे?

उत्तर:
  • चंगेज खान से जुड़ी स्मृतियों के साथ असंख्य लोगों के नरसंहार और बर्बरता का इतिहास जुड़ा हुआ था।
  • इसके विपरीत, तैमूर ने 1398 में दिल्ली पर अधिकार किया था और उनके पूर्वज होने पर मुग़लों को अपनी शक्ति पर गर्व था।
व्याख्या: राजनीतिक प्रतिष्ठा और गरिमा बनाए रखने के लिए वे खुद को तैमूर के वंशज के रूप में प्रचारित करते थे।

प्र.10 मुग़ल प्रशासनिक व्यवस्था में 'मनसबदार' और 'जागीरदार' शब्दों से क्या तात्पर्य है?

उत्तर:
  • मनसबदार: वह व्यक्ति जिसे कोई 'मनसब' (यानी पदानुक्रम या श्रेणी) दी जाती थी, जिससे उसका वेतन और सैन्य उत्तरदायित्व तय होता था।
  • जागीरदार: मनसबदारों को अपने वेतन का भुगतान नकद के बजाय कर वसूलने वाली भूमि के रूप में मिलता था, जिसे जागीर कहते थे और वे इसके प्रबंधक (जागीरदार) होते थे।
व्याख्या: यह मुग़ल साम्राज्य की प्रशासनिक और सैन्य रीढ़ थी।

प्र.11 अकबर की 'सुलह-ए-कुल' की नीति का मुख्य उद्देश्य क्या था और यह समाज को कैसे प्रभावित करती थी?

उत्तर:
  • इसका उद्देश्य किसी भी धर्म या जाति के आधार पर भेदभाव न करना और साम्राज्य में धार्मिक शांति व सहिष्णुता बनाए रखना था।
  • इसके तहत साम्राज्य के सभी नागरिकों को न्याय, सम्मान और सुरक्षा मिलती थी, चाहे वे किसी भी मत के अनुयायी हों।
व्याख्या: इस उदार नीति ने बहुसांस्कृतिक मुग़ल साम्राज्य को राजनीतिक स्थिरता प्रदान की।

खंड 'द' : दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)

(प्रत्येक प्रश्न 4 अंक - कुल 8 अंक)

प्र.12 अकबर के शासनकाल और उसकी प्रशासनिक-राजस्व नीतियों (विशेषकर ज़ब्त प्रणाली और मनसबदारी) का विस्तृत मूल्यांकन कीजिए।

उत्तर:
  • साम्राज्य विस्तार: अकबर ने अपने सैन्य अभियानों से उत्तर भारत से लेकर दक्षिण तक एक विशाल साम्राज्य स्थापित किया।
  • राजस्व सुधार (ज़ब्त प्रणाली): टोडरमल की मदद से भूमि की पैमाइश करवाकर फसलों के औसत उत्पादन और मूल्य पर कर तय किया गया, जिससे बिचौलियों का शोषण कम हुआ।
  • मनसबदारी प्रणाली: इसके माध्यम से कुलीन वर्ग और सैन्य अधिकारियों को सीधे केंद्रीय नियंत्रण में बांधा गया।
  • निष्कर्ष: इन नीतियों ने मुग़ल साम्राज्य को आर्थिक रूप से समृद्ध और राजनीतिक रूप से सुदृढ़ बनाया।
व्याख्या: अकबर की प्रशासनिक कुशलता ही मुग़ल साम्राज्य की नींव को मजबूत करने का मुख्य आधार बनी।

प्र.13 सत्रहवीं सदी और उसके बाद मुग़ल साम्राज्य में आए परिवर्तनों तथा औरंगजेब की नीतियों के प्रभावों का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए।

उत्तर:
  • साम्राज्य का चरमोत्कर्ष: शाहजहाँ और औरंगजेब के शुरुआती दौर तक साम्राज्य बहुत विस्तृत हो चुका था।
  • औरंगजेब की नीतियाँ: उसकी दक्कन नीति और धार्मिक असहजता की नीतियों (जैसे गैर-मुसलमानों पर कर और क्षेत्रीय राजाओं से अनबन) ने असंतोष पैदा किया।
  • आर्थिक संकट: लगातार युद्धों के कारण राजकोष खाली होने लगा और जागीरों की कमी (जागीरदारी संकट) पैदा हो गई।
  • पतन की शुरुआत: औरंगजेब की मृत्यु के बाद मुग़ल साम्राज्य का तेजी से विघटन होने लगा और क्षेत्रीय ताक़तें उभरकर सामने आईं।
व्याख्या: यह विश्लेषण मुग़ल साम्राज्य के उत्थान और पतन के अंतर्संबंधों को स्पष्ट करता है।

कोई टिप्पणी नहीं:

Blogger द्वारा संचालित.