सामाजिक विज्ञान: कक्षा 7 (हमारा इतिहास - हमारे अतीत II)
अध्याय 4: मुग़ल साम्राज्य (सोलहवीं से सत्रहवीं शताब्दी)
1. अध्याय का परिचय एवं मुख्य अवधारणाएँ
मुग़ल कौन थे?: मुग़ल दो महान शासक वंशों के वंशज थे। माता की ओर से वे मंगोल शासक चंगेज खान (जो चीन और मध्य एशिया के कुछ भागों पर राज करता था) के उत्तराधिकारी थे और पिता की ओर से वे ईरान, इराक एवं वर्तमान तुर्की पर शासन करने वाले तैमूर (जिसकी मृत्यु 1404 में हुई) के वंशज थे। हालांकि, मुग़ल अपने को 'मुग़ल' या 'मंगोल' कहलवाना पसंद नहीं करते थे, क्योंकि चंगेज खान से जुड़ी स्मृतियों के साथ असंख्य लोगों का नरसंहार जुड़ा था। वे अपने को 'तैमूरी' कहलाना गर्व महसूस करते थे।
प्रमुख मुग़ल शासक: भारत में मुग़ल साम्राज्य की नींव बाबर ने 1526 में पानीपत के प्रथम युद्ध में इब्राहिम लोदी को हराकर रखी थी। इसके बाद हुमायूँ, अकबर, जहाँगीर, शाहजहाँ और औरंगजेब ने इस साम्राज्य का विस्तार किया।
2. मुग़ल सैन्य अभियान और प्रशासनिक नीतियाँ
- प्रमुख सैन्य अभियान:
- बाबर (1526–1530): 1526 में पानीपत में इब्राहिम लोदी को, 1527 में खानवा में राणा सांगा को पराजित किया।
- अकबर (1556–1605): अकबर का शासनकाल मुग़ल साम्राज्य के विस्तार और मजबूती के लिए जाना जाता है। उसने उत्तर भारत (हल्दीघाटी का युद्ध, 1576) से लेकर दक्कन (दक्षिण भारत) तक अपना प्रभाव फैलाया।
- औरंगजेब (1658–1707): इसके काल में मुग़ल साम्राज्य अपने सबसे बड़े भू-भाग पर फैला, परंतु दक्षिण के लंबे सैन्य संघर्षों ने साम्राज्य की नींव कमजोर कर दी।
मनसबदार और जागीरदार व्यवस्था: मुग़लों ने साम्राज्य में प्रशासनिक पदों को संभालने के लिए 'मनसबदार' व्यवस्था शुरू की। 'मनसब' का अर्थ एक पद या श्रेणी होता था। मनसबदारों को उनके वेतन का भुगतान 'जागीर' (राजस्व देने वाली भूमि) के रूप में मिलता था, जिन्हें जागीरदार कहा जाता था।
जब्त और भू-राजस्व: अकबर के राजस्व मंत्री टोडरमल ने प्रत्येक प्रांत को राजस्व मंडलों में बाँटा और फसल की दरों तथा नकद मूल्य की एक सूची तैयार की, जिसे 'जब्त' प्रणाली कहा गया।
3. अकबर की धार्मिक नीतियाँ और शासन के सिद्धांत
सुलह-ए-कुल: अकबर ने धार्मिक सहिष्णुता की नीति अपनाई जिसे 'सुलह-ए-कुल' (सर्वोच्च शांति या सभी के साथ शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व) कहा गया। इस नीति का उद्देश्य विभिन्न धर्मों (इस्लाम, हिंदू, ईसाई, जैन, पारसी आदि) के बीच भेद न करके न्याय और शांति स्थापित करना था।
अकबरनामा और आइन-ए-अकबरी: अकबर के नवरत्नों में से एक अुलफज़ल ने 'अकबरनामा' नामक ग्रंथ की रचना की, जिसका तीसरा भाग 'आइन-ए-अकबरी' है। इसमें अकबर के प्रशासन, घराने, सेना और राजस्व का विस्तृत विवरण मिलता है।
खंड 'अ' : बहुविकल्पीय एवं विश्लेषणात्मक प्रश्न (Multiple Choice Questions)
(प्रत्येक प्रश्न 1 अंक - कुल 4 अंक)
प्र.1 मुग़ल शासक अपने आपको किस महान आक्रमणकारी का वंशज कहलाना गर्व महसूस करते थे, जबकि वे मंगोल चंगेज खान के भी वंशज थे? (अ) नादिर शाह (ब) तैमूर (स) अहमद शाह अब्दाली (द) कुतुबुद्दीन ऐबक
प्र.2 वर्ष 1526 में पानीपत के प्रथम युद्ध में इब्राहिम लोदी को हराकर भारत में मुग़ल साम्राज्य की नींव किसने रखी थी? (अ) हुमायूँ (ब) बाबर (स) अकबर (द) शेरशाह सूरी
प्र.3 मुग़ल प्रशासन में अपने पद, वेतन और सैन्य उत्तरदायित्व (जात एवं सवार) तय करवाने वाली व्यवस्था को क्या कहा जाता था? (अ) मनसबदारी व्यवस्था (ब) इक्ता प्रणाली (स) जागीरदारी प्रथा (द) मनसब और जात प्रथा
प्र.4 अकबर के नवरत्नों में शामिल किस विद्वान ने 'अकबरनामा' और उसके प्रसिद्ध भाग 'आइन-ए-अकबरी' की रचना की थी? (अ) बीरबल (ब) राजा टोडरमल (स) अबुल फजल (द) तानसेन
खंड 'ब' : अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Questions)
(प्रत्येक प्रश्न 1 अंक - कुल 4 अंक)
प्र.5 अकबर के राजस्व मंत्री राजा टोडरमल द्वारा भू-राजस्व की किस प्रसिद्ध प्रणाली को लागू किया गया था?
प्र.6 अकबर द्वारा शुरू की गई धार्मिक सहिष्णुता और सर्वधर्म समभाव की नीति को क्या नाम दिया गया था?
प्र.7 हल्दीघाटी का प्रसिद्ध युद्ध किस वर्ष और किसके बीच लड़ा गया था?
प्र.8 औरंगजेब के शासनकाल के दौरान मुग़ल साम्राज्य के पतन का एक मुख्य कारण क्या उभरकर सामने आया?
खंड 'स' : लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)
(प्रत्येक प्रश्न 3 अंक - कुल 9 अंक)
प्र.9 मुग़ल अपनी वंशावली को लेकर मंगोलों की बजाय तैमूर के वंशज कहलाना क्यों अधिक पसंद करते थे?
- चंगेज खान से जुड़ी स्मृतियों के साथ असंख्य लोगों के नरसंहार और बर्बरता का इतिहास जुड़ा हुआ था।
- इसके विपरीत, तैमूर ने 1398 में दिल्ली पर अधिकार किया था और उनके पूर्वज होने पर मुग़लों को अपनी शक्ति पर गर्व था।
प्र.10 मुग़ल प्रशासनिक व्यवस्था में 'मनसबदार' और 'जागीरदार' शब्दों से क्या तात्पर्य है?
- मनसबदार: वह व्यक्ति जिसे कोई 'मनसब' (यानी पदानुक्रम या श्रेणी) दी जाती थी, जिससे उसका वेतन और सैन्य उत्तरदायित्व तय होता था।
- जागीरदार: मनसबदारों को अपने वेतन का भुगतान नकद के बजाय कर वसूलने वाली भूमि के रूप में मिलता था, जिसे जागीर कहते थे और वे इसके प्रबंधक (जागीरदार) होते थे।
प्र.11 अकबर की 'सुलह-ए-कुल' की नीति का मुख्य उद्देश्य क्या था और यह समाज को कैसे प्रभावित करती थी?
- इसका उद्देश्य किसी भी धर्म या जाति के आधार पर भेदभाव न करना और साम्राज्य में धार्मिक शांति व सहिष्णुता बनाए रखना था।
- इसके तहत साम्राज्य के सभी नागरिकों को न्याय, सम्मान और सुरक्षा मिलती थी, चाहे वे किसी भी मत के अनुयायी हों।
खंड 'द' : दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)
(प्रत्येक प्रश्न 4 अंक - कुल 8 अंक)
प्र.12 अकबर के शासनकाल और उसकी प्रशासनिक-राजस्व नीतियों (विशेषकर ज़ब्त प्रणाली और मनसबदारी) का विस्तृत मूल्यांकन कीजिए।
- साम्राज्य विस्तार: अकबर ने अपने सैन्य अभियानों से उत्तर भारत से लेकर दक्षिण तक एक विशाल साम्राज्य स्थापित किया।
- राजस्व सुधार (ज़ब्त प्रणाली): टोडरमल की मदद से भूमि की पैमाइश करवाकर फसलों के औसत उत्पादन और मूल्य पर कर तय किया गया, जिससे बिचौलियों का शोषण कम हुआ।
- मनसबदारी प्रणाली: इसके माध्यम से कुलीन वर्ग और सैन्य अधिकारियों को सीधे केंद्रीय नियंत्रण में बांधा गया।
- निष्कर्ष: इन नीतियों ने मुग़ल साम्राज्य को आर्थिक रूप से समृद्ध और राजनीतिक रूप से सुदृढ़ बनाया।
प्र.13 सत्रहवीं सदी और उसके बाद मुग़ल साम्राज्य में आए परिवर्तनों तथा औरंगजेब की नीतियों के प्रभावों का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए।
- साम्राज्य का चरमोत्कर्ष: शाहजहाँ और औरंगजेब के शुरुआती दौर तक साम्राज्य बहुत विस्तृत हो चुका था।
- औरंगजेब की नीतियाँ: उसकी दक्कन नीति और धार्मिक असहजता की नीतियों (जैसे गैर-मुसलमानों पर कर और क्षेत्रीय राजाओं से अनबन) ने असंतोष पैदा किया।
- आर्थिक संकट: लगातार युद्धों के कारण राजकोष खाली होने लगा और जागीरों की कमी (जागीरदारी संकट) पैदा हो गई।
- पतन की शुरुआत: औरंगजेब की मृत्यु के बाद मुग़ल साम्राज्य का तेजी से विघटन होने लगा और क्षेत्रीय ताक़तें उभरकर सामने आईं।

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